सोनभद्र। छात्र-छात्राओं को एनीमिया से मुक्ति दिलाने के लिए चलाया जा रहे स्कूल स्वास्थ्य कार्यक्रम के क्रियान्वयन की स्थिति चिंताजनक है। पिछले तीन महीनों में बेसिक और माध्यमिक के 156 विद्यालयों की जांच में चौंकाने वाली सच्चाई सामने आई है। 28 विद्यालयों में आयरन और फोलिक एसिड की गोलियां ही नहीं थीं। 49 विद्यालयों में रजिस्टर अपडेट नहीं था। नौ विद्यालयों में इससे जुड़ी गतिविधियां शून्य मिलीं। संस्था ने डीआईओएस और बीएसए को पत्र भेजकर विद्यालयों में व्यवस्था सुधारने के लिए कहा है।
स्वास्थ्य महकमे से जुड़ी संस्था (सेंटर फॉर नॉलेज एंड डेवलपमेंट) की टीम ने एक सितंबर से 30 नवंबर के बीच स्कूल स्वास्थ्य कार्यक्रम की स्थिति की थी। इस योजना के तहत प्रत्येक सप्ताह 10 से 19 साल के छात्र-छात्राओं को आयरन की गोलियां खिलाई जानी थीं। स्वास्थ्य जागरूकता को लेकर कार्यक्रम आयोजित किए जाने थे।
इस दौरान कृमिनाशक गोलियां भी खिलाई जानी थीं ताकि सभी छात्र-छात्राएं स्वस्थ रह सकें। निरीक्षण की विशेष मुहिम के दौरान घोरावल, नगवां, राबटर्सगंज, चतरा और चोपन क्षेत्र के 156 प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और विद्यालयों की जांच की गई। इस दौरान 128 विद्यालयों में आयरन गोलियां ही उपलब्ध नहीं थीं। वहीं, 60 ऐसे विद्यालय पाए गए, जिनका रजिस्टर ही दुरूस्त नहीं था।
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इन विद्यालयों में हालात सबसे चिंताजनक
शहजादा इंटर कॉलेज रामगढ़, पं. दीनदयाल उपाध्याय राजकीय इंटर कालेज, कंपोजिट विद्यालय पुरनाखुर्द, उच्च प्राथमिक विद्यालय नेवारी, घोरावल क्षेत्र के कड़िया स्थित विद्यालय, उच्च प्राथमिक विद्यालय कंपोजिट स्कूल कांशीराम, उच्च प्राथमिक विद्यालय डोरिया, कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय नंदना, कंपोजिट विद्यालय सुअरसोत में जहां आयरन गोली के साथ ही इससे जुड़ी गतिविधियां शून्य मिली। वहीं, कन्या हाईस्कूल पनारी, कन्या हाईस्कूल जुगैल, गुरूद्वारा इंटर कालेज चोपन, उच्च प्राथमिक विद्यालय सिरसाई अमिलौंधा, भरोली, कन्या हाईस्कूल हिनउत, उच्च प्राथमिक विद्यालय हिनौती, बिसरेखी, लसरी कला, कंपोजिट विद्यालय कुसहरा, कंपोजिट विद्यालय सुअरसोत, गर्ल्स हाइस्कूल चतरा, उच्च प्राथमिक विद्यालय करारी और नगर पंचायत चुर्क में आयरन गोलियां नहीं थीं।
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यह किशोर वर्ग के स्वास्थ्य से जुड़ा मसला है। इसमें लापरवाही नहीं की जा सकती। डीआईओएस और बीएसए को पत्र भेजकर कहा गया है कि वह सभी विद्यालयों को कड़े निर्देश जारी करें और कार्यक्रम को प्रभावी बनाते हुए छात्र-छात्राओं को इसका लाभ दिलाएं। - डॉ. पीके राय, सीएमओ।