राबर्ट्सगंज के सार्वजनिक स्थलों पर कोई घटना हो जाए तो बदमाशों की शिनाख्त करना मुश्किल हो जाएगा। वजह, पुलिस ने बढ़ौली चौक पर जो सीसीटीवी कैमरे लगाए थे उसे चंद दिनों बाद ही उतरवा दिए। सड़क के चौड़ा करने के बहाने तीसरी आंख फिर से न लगाने को लेकर यातायात, अवैध वसूली और ओवरलोड वाहनों के आवाजाही को मुख्य रूप से जोड़कर देखा जा रहा है।डीजीपी के निर्देश पर 2014 में राबर्ट्सगंज कोतवाली गेट के बाहर एक और बढ़ौली चौक पर स्थित एक विद्युत पोल में चार सीसी टीवी कैमरे लगाए गए थे।
इसका कंट्रोल रूम कोतवाली को बनाया गया। सिविल लाइंस स्थित बढ़ौली चौक पर चार कैमरे चारों दिशाओं को कवर करते थे। सीसीटीवी लगने का असर भी दिखने लगा। मटरगश्ती करने और बेतरतीब ढंग से बाइक चलाने वालों की शामत आ गई। कैमरा लगने से ओवरलोड वाहन की आवाजाही रिकार्ड होने से मोटर मालिकों को कैमरे खटकने लगे। इसी तरह यातायात पुलिस और थाने चौकी, गश्त करने वाले सिपाहियों की रात की गतिविधियां भी कैद होने लगी।
एसओ से लेकर सीओ तक को कैमरे खटकने लगे। बीच में इन कैमरों को बंद कर दिया गया। इसकी जानकारी तत्कालीन एसपी शिवशंकर यादव को हुई तो उन्होंने इंस्पेक्टर को फटकार लगाते हुए कैमरों को फिर शुरू कराने को कहा। इसी बीच वर्ष 2015 में सड़क निर्माण के दौरान पुलिस को कैमरा हटाने का बहाना मिल गया। सड़क निर्माण पूरा होने के बाद भी सीसीटीवी धूल फांक रहे हैं। ऐसे में अपराधिक प्रवृत्ति के लोगों की फिर चहलकदमी बढ़ गई है।
दुद्धी में कोतवाली गेट, संकट मोचन मंदिर, कचहरी गेट पर लगाए गए कैमरे आज भी काम कर रहे हैं। एएसपी मुख्यालय शंभूशरण यादव का कहना हैं कि कैमरा हटाने जाने की जानकारी उन्हें नहीं है। कल तक बढ़ौली चौक से उतारे गए सीसी कैमरों को पुन: उसी स्थान पर लगवाया जाएगा।