इसी विधानसभा क्षेत्र की चुर्क नगर पंचायत में भी भाजपा प्रत्याशी को बड़ी जीत मिली है। दुद्धी नगर पंचायत का परिणाम भी भाजपा के पक्ष में एकतरफा ही रहा। इनके अलावा पिपरी में भाजपा और चोपन में सहयोगी दल के प्रत्याशी जीते हैं। यह दोनों निकाय ओबरा विधानसभा क्षेत्र में हैं, जहां के विधायक सूबे की सरकार में राज्य मंत्री भी हैं। इसी क्षेत्र में आने वाले डाला, ओबरा, रेणुकूट और अनपरा नगर पंचायत में भाजपा प्रत्याशियों को करारी हार का सामना करना पड़ा। इसमें डाला राज्यमंत्री का गृह नगर है, जबकि ओबरा भी उससे सटा है।
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घोरावल में भी दो बार से भाजपा विधायक को जीत मिली है। लोकसभा में भी यहां पार्टी का दबदबा रहा, लेकिन निकाय चुनाव में यहां बसपा का झंडा बुलंद हुआ है। महज एक साल में आए बदलावों पर पार्टी के अंदरखाने में मंथन जारी है। हार के कारणों को लेकर जनप्रतिनिधि अलग-अलग तर्क दे रहे हैं।
नवसृजित डाला नगर पंचायत से निर्वाचित हुईं फूलवंती
- फोटो : अमर उजाला
सोनभद्र जिले की निकायों को इस बार युवा और ग्रेजुएट चेयरमैन मिले हैं। दस में से आठ निकायों के अध्यक्ष के पास स्नातक की डिग्री है। वहीं छह चेयरमैन ऐसे हैं, जिनकी उम्र 45 से कम है। डाला की फूलवंती सबसे युवा हैं तो अनपरा के विश्राम सबसे वरिष्ठ और अनुभवी हैं। नगर पालिका से निर्वाचित रूबी प्रसाद पहली चेयरमैन हैं, जिन्होंने विधानसभा में भी क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया है।
निर्वाचन आयोग ने चेयरमैन का चुनाव लड़ने के लिए न्यूनतम आयु की सीमा 30 वर्ष निर्धारित की थी। नवसृजित डाला नगर पंचायत से निर्वाचित हुईं फूलवंती की उम्र भी ठीक 30 वर्ष ही है। इसी तरह जिले की सबसे बड़ी निकाय अनपरा ने चेयरमैन चुनने में भी उम्र और अनुभव का ध्यान रखा है। यहां से निर्वाचित हुए विश्राम बैसवार सबसे उम्रदराज चेयरमैन होंगे। उनकी आयु 61 वर्ष है।
पूर्व विधायक रूबी प्रसाद अब सोनभद्र नगर पालिका की अध्यक्ष
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वह वर्ष 2005 से 2015 तक लगातार दो बार ग्राम पंचायत के प्रधान भी रहे। उन्हें राष्ट्रपति पुरस्कार भी मिला है। नगर पालिका सोनभद्र से चुनी गईं रूबी प्रसाद का भी राजनीतिक अनुभव कम नहीं है। वह वर्ष 2012 से 2017 तक प्रदेश की अंतिम विधानसभा सीट दुद्धी से विधायक रह चुकी हैं। उन्होंने निर्दल उम्मीदवार के रूप में जीत हासिल की थी। जिले के इतिहास में विधायक बनने वाली वह इकलौती महिला भी हैं।