सोनभद्र। वैश्विक महामारी के बीच सबसे ज्यादा हाय तौबा मची है तो वह आक्सीजन के लिए। जब संक्रमितों का आक्सीजन स्तर कम हो रहा है तो उनका जीवन बचाने के लिए यहीं एकमात्र उपाय है। ऐसे में सरकार ऑक्सीजन को लेकर अलर्ट मोड में है। जिले में आक्सीजन की समस्या का स्थायी रूप से समाधान हो इसके लिए करहिया में वर्षों के से बंद ऑक्सीजन प्लांट को चालू करने की कवायद हुई है। मंडलायुक्त के निर्देश पर यहां युद्ध स्तर पर काम हो रहा है। जब यहां से ऑक्सीजन भराई का काम शुरू होगा तो सोनांचल के साथ-साथ पड़ोसी जनपदों को भी लाभ मिलेगा। यहां प्रतिदिन 300 सिलेंडर भरे जा सकेंगे। खास बात यह कि बगैर लिक्विड के ऑक्सीजन तैयार होगी।
करीब दो दशक पहले 2002 में एसके लूथरा ने करहिया में ऑक्सीजन प्लांट की नींव रखी थी। प्लांट स्थापना के कुछ वषों तक स्थिति ठीक रही। प्लांट नियमित रूप से 100 क्यूबिक मीटर प्रति घंटे के हिसाब से लगभग 300 सिलेंडर गैस का उत्पादन कर रहा था। यह सिलेंडर एनटीपीसी, हिंडाल्को सहित आस-पास की कंपनियों में जाते थे। इसी बीच करीब छह वर्ष पहले बिजली की समस्या उत्पन्न हो गई। जब यहां बिजली की समस्या उत्पन्न हुई तो प्लांट से उत्पादन ठप हो गया। अब इसे चालू करने की दिशा में काफी काम हो चुका है। एसडीएम दुद्धी रमेश कुमार ने बताया कि लगभग काम हो चुका है। रविवार को इसकी समीक्षा की जाएगी। टेस्टिंग करके सिलेंडर भरने का काम शुरू करने का पूरा प्रयास है।
कैसे बनता है ऑक्सीजन
करहिया स्थित ऑक्सीजन प्लांट के प्रबंधक पीएन प्रसाद बताते हैं कि आक्सीजन बनाने की एक प्रक्रिया होती है। वायुमंडल से हम हवा लेते हैं। उसे एक प्रक्रिया के तहत फिल्टर किया जाता है। ऐसा करने से धूल-मिट्टी इससे अलग हो जाती है। इसके बाद उसे कई चरण में कंप्रेस यानी उस पर दबाव डाला जाता है। ये सभी प्रक्रियाएं करते हुए -185 डिग्री तापमान पर ठंडा किया जाता है। इसी से ऑक्सीजन तैयार होती है।
विध्याचल मंडल के मंडलायुक्त योगेश्वर राम मिश्र ने बताया कि सोनभद्र के करहिया में जो ऑक्सीजन प्लांट है। वहां ऑक्सीजन बनाने के लिए लिक्विड की जरूरत नहीं होगी। यहां रविवार को टेस्टिंग की जाएगी। यहां सिलेंडर भराव से सोनभद्र की जरूरत पूर्ण होगी और जरूरत पड़ने पर आस-पास के जनपदों को भी लाभ मिलेगा।