बिल्ली-मारकुंडी में शुक्रवार की सुबह देव प्रकाश मौर्य के खदान में हुए हादसे ने एक बार फिर जिम्मेदारों के गठजोड़ का खुलासा कर दिया है। कदम-कदम पर खान सुरक्षा निदेशालय के नियम तोड़े गए। इस हादसे को लेकर जिला प्रशासन और पुलिस दैवी आपदा कहकर पूरे मामले से पल्ला झाड़ते नजर आए। हादसे के वक्त महज कागजों में ही ब्लास्टर की तैनाती थी बल्कि अप्रशिक्षित मजदूरों से होल भरवाया गया था। बारिश के बीच ब्लास्टिंग के दौरान होल भरे जाने, पत्थरों की तोड़ाई और लोडिंग में लीज धारक ने खान सुरक्षा निदेशालय के मानक की अनदेखी की गई।
खनन सुरक्षा निदेशालय का सख्त निर्देश है कि जब विस्फोट के लिए जिलेटिन-डेटोनेटर से होल भरे जाएंगे, तब वहां प्रशिक्षित ब्लास्टर के अलावा कोई मजदूर मौजूद नहीं रहेगा। इस दौरान पत्थरों की लोडिंग और तोड़ाई का काम भी बंद रहेगा। मगर जिला प्रशासन, पुलिस अधिकारी, खान विभाग की चुप्पी के चलते मनबढ़ हुए लीज धारक नियम को ताक पर रखकर पत्थर की तोड़ाई करते हैं। शुक्रवार को हुए हादसे के दौरान देव प्रकाश मौर्या के खदान पर नियमों का पालन नहीं हुआ।
इसी का नतीजा रहा कि जब भरे गए 80 होल में से एक-एक कर 77 होल एक साथ ब्लास्ट हुए तो खदान में काम कर रहे मजदूर मलबे के नीचे दब गए। सूत्र बताते हैं कि बारिश के दौरान भी ब्लास्टिंग के लिए होल भरे जा रहे थे। दोपहर 12 से दो बजे के बीच ब्लास्टिक का समय है। साढ़े दस बजे होल भरते समय अचानक बारिश शुरू हो गई। गरज तड़क के साथ बिजली तड़की और विस्फोट हो गया।