शक्तिनगर। खुली कोयला खदानों (ओपन कास्ट माइनिंग) से 122 मिलियन टन कोयला निकासी करने वाली एनसीएल अब भूमिगत कोयला खनन के दिशा में कार्य कर रही है। यह खनन मुहेर बेसिन के उन हिस्सों में होगी, जहां कोयला धरातल से काफी काफी नीचे है। शनिवार को यह जानकारी एनसीएल के सीएमडी भोला सिंह ने दिया।
सीएमडी ने बताया कि कोयला उत्पादन लक्ष्य व बढ़ रही मांग को पूरा करने के लिए एनसीएल की दुद्धीचुआ, जयंत व निगाही कोयला खदानों का विस्तार किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इसके लिए अतिरिक्त भूमि की आवश्यकता होगी। मोरवा क्षेत्र के विस्थापन का संकेत देते हुए उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में मौजूद एनसीएल का मुख्यालय सिंगरौली (बैढ़न) स्थानांतरित किया जाएगा। इस दिशा में कार्य किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि कंपनी का लक्ष्य 2024 तक 130 मिलियन टन से अधिक कोयला उत्पादन की है। फिलहाल एनसीएल मुहेर बेसिन के करीब 40 फीसदी हिस्से से कोयला निकाल रही है। शेष हिस्से में कोयला काफी नीचे है इसलिए अंडरग्राउंड माइनिंग पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि एनसीएल ने सीएसआर के तहत सिंगरौली में माइनिंग कॉलेज की स्थापना के लिए 75 करोड़ फंड का प्रावधान किया जिससे रोजगारपरक उच्च शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा। सीएमडी श्री सिंह ने विश्वास जताया कि एनसीएल बतौर एक अग्रणी कोल कंपनी, पर्यावरण तथा स्थानीय नागरिकों व भूधारकों के हितों को ध्यान में रखते हुए देश की ऊर्जा आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करने में अपनी भूमिका निभाती रहेगी।