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तेल के खेल में एनसीएल को लगा करोड़ों का चूना

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शक्तिनगर। एनसीएल की कोयला खदानों में डीजल आपूर्ति के नाम पर बड़े पैमाने पर घोटाला सामने आया है। इंडियन ऑयल के डिपो से निकलने वाला टैंकर खदान से पहले चिह्नित पंपों पर पहुंचता था। वहां डीजल की आधी मात्रा निकाल दी जाती थी। अहम बात यह कि आधे से अधिक डीजल की बिक्री के बाद भी एनसीएल के रिकार्ड में उतनी ही मात्रा की रिसिविंग होती थी, जितनी डिपो से निकली थी। इस हेरफेर के बदले डीजल चोर गिरोह के सदस्य एनसीएल के कर्मचारियों को 34 प्रति लीटर की दर से कमीशन भी देते थे। शुक्रवार को एसटीएफ की गिरफ्त में आए गिरोह के सदस्यों ने पूछताछ में यह चौंकाने वाला खुलासा किया है। पूरे मामले में एनसीएल के कई कर्मचारियों की भी बड़ी भूमिका सामने आई है। जांच टीम यह पता लगाने में जुटी है कि यह खेल कितने समय से चल रहा था और अब तक कितने लीटर डीजल को खपाया गया है। एसटीएफ ने शुक्रवार को एक ट्रांसपोर्टर सहित छह लोगों को गिरफ्तार किया था। पकड़े गए आरोपियों के पास से आठ लाख 29 हजार नकद, दो कार, 12 हजार लीटर डीजल भरा टैंकर, दस महंगे मोबाइल फोन बरामद हुए थे। पुलिस के मुताबिक एनसीएल दुद्धीचुआ, खड़िया, बीना एवं ककरी कोयला परियोजनाओं में मौजूद मशीनों व वाहनों को चलाने के लिए डीजल की आपूर्ति इंडियन आयल कार्पोरेशन लिमिटेड मुगलसराय टर्मिनल से किया जाता है। एसटीएफ की गिरफ्त में आए सरगना पुष्पराज यादव ने पूछताछ में बताया कि एनसीएल के कर्मचारियों की मिलीभगत से परियोजना तक पहुंचने से पहले ही आसपास के पहले से निश्चित पेट्रोल पंपों पर तेल बेच दिया जाता है। इसके बाद एनसीएल के कर्मचारियों के सहयोग से जितनी मात्रा में डिपो से तेल प्राप्त हुआ रहता है, उतनी ही मात्रा एनसीएल के संबंधित में रजिस्टर पर प्राप्त करा दिया जाता था। इसके एवज में एनसीएल के कर्मचारी को 34 रुपये प्रति लीटर की दर से पैसा दिया जाता है। इस गिरोह में शामिल मुर्तजा खान ने पूछताछ में बताया कि उसके पास लगभग 45 तेल टैंकर हैं, जिसमें से 14 तेल टैंकर इंडियन ऑयल डिपो मुगलसराय में नेशनल ट्रांसपोर्ट कैरियर के नाम से रजिस्टर्ड हैं। इनसे एनसीएल में आपूर्ति की जाती है।
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