भविष्य की जरूरतों और कोल इंडिया की ओर से एनसीएल को 2020 तक 110 मिलियन टन वार्षिक कोल उत्पादन के दिए गए लक्ष्य के परिप्रेक्ष्य में जयंत परियोजना को विस्तार देने के लिए सिंगरौली जिले के मोरवा स्थित एनसीएल मुख्यालय को दूसरी जगह शिफ्ट किया जाएगा। इसके बाद यहां की आवासीय कालोनी को भी दूसरी जगह स्थापित कर, पास स्थित मोरवा बाजार और आसपास के लोगों को पुनर्वास लाभ देते हुए विस्थापित किए जाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
इसके जद में आने वालों की संख्या हजारों में बताई जा रही है। अभी एनसीएल मुख्यालय और कालोनी कहां स्थापित किए जाएगी, इसको सार्वजनिक नहीं किया गया है। हालांकि पूरे प्रस्ताव को कोल इंडिया की ओर से मंजूरी दे दी गई है। 2020 के लक्ष्य को देखते हुए एनसीएल जयंत व झिंगुरदा परियोजना का विस्तार कर उत्पादन क्षमता दोगुनी की जानी है। झिंगुरदा के विस्तार में खाली जमीन पड़ रही है, इसलिए किसी को विस्थापित नहीं होना पड़ रहा है लेकिन जयंत के विस्तार में एनसीएल का मौजूदा मुख्यालय, आवासीय कालोनी और मोरवा बाजार की पूरी एरिया आ रही है।
चूंकि पूर्व में कराई गई ड्रिलिंग में यहां की कोयले की गुणवत्ता बेहतर पाई गई है और कोयले की मोटी परत भी महज तीस से चालीस फीट नीचे से शुरू हो जा रही है। इसको लेकर देखते हुए कोल इंडिया की अनुषंगी और भारत की मिनी रत्न कंपनी एनसीएल ने आवासीय कालोनी के साथ ही खुद का मुख्यालय भी दूसरी जगह स्थानांतरित करने का निर्णय लिया है। वहीं मोरवा बाजार और इससे सटे रह रहे लोगों को दूसरी जगह प्रतिस्थापित किए जाने की कवायद शुरू हो गई है। पूरी प्रक्रिया में दस से 15 साल लगने की उम्मीद है। उधर, एनसीएल प्रवक्ता सीरज कुमार सिंह ने भी जयंत परियोजना का मोरवा तक विस्तार किए जाने के कवायद की पुष्टि की। कहा कि नियमानुसार विस्थापन से जुड़ा जो भी लाभ होगा, कंपनी संबंधित को देगी। इसमें किसी तरह की भ्रांति पालने की जरूरत नहीं है।