सोनभद्र। डाला स्थित अचलेश्वर महादेव मंदिर में मानस प्रवचन का बृहस्पतिवार की रात समापन हुआ। कथावाचक आचार्य बृजेश दीक्षित ने भरत चरित्र, सीताहरण, बालि वध और राम-रावण युद्ध का प्रसंग सुनाया।
उन्होंने कहा कि जिसका आदि और अंत नहीं है, वह सनातन धर्म संस्कृति है। निष्ठा, लगन व भक्ति से किया गया कोई कार्य कभी व्यर्थ नहीं होता। प्रभु को निष्ठावान लोग अतिप्रिय हैं। कहा कि भरत के अंदर त्याग और समर्पण का भाव था। उनका विमल यश चंद्रमा की भांति है। उनके चरित्र का वर्णन ना तो शेष ना नरेश, नारद शारद कोई नहीं कर सकता। भरत की महिमा जलाशय की भांति है। ऋषि वशिष्ठ भी बखान नहीं कर सकते। भरत के प्रेम में रामजी डूब जाते थे, इसलिए उनका वर्णन राम जी भी नहीं कर पाए। कथा विराम के बाद मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की भव्य आरती कर प्रसाद का वितरण हुआ। संचालन आचार्य पं. राजेश मिश्र ने किया। इस दौरान मंदिर के महंत मुरली तिवारी, मानस परिवार समिति के अध्यक्ष नीरज पाठक, राजवंश चौबे, ईश्वर जायसवाल, पवन शर्मा आदि रहे।