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संग्रहालय दिवस : दम तोड़ रही धरोहरों को संरक्षित करने की कवायद

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जिले में रविवार को अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस मनाया जा रहा है। इसके जरिए धरोहरों के संरक्षण पर जोर के साथ ही संग्रहालयों के महत्व को उजागर करना है। सोनभद्र सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टि से समृद्ध है।
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यहां की धरती परंपराओं, लोक संस्कृति और अंग्रेजों और मुगलों के अत्याचार के खिलाफ संघर्ष की गवाह रही है। हालांकि यहां धरोहर को सहेजने को लेकर जिम्मेदार गंभीर नहीं हैं।

पुरातात्त्विक धरोहरों के संरक्षण के लिए दूसरों को जागरूक करने में जुटा विभाग खुद अपनी धरोहर की सुरक्षा नहीं कर पा रहा। घोरावल के आमडीह में बना राजकीय संग्रहालय बदहाल है। भवन जर्जर हो चुका है। जगह-जगह दरारें पड़ चुकी हैं।
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बाउंड्री का एक हिस्सा ढह चुका है। यहां रखी धरोहरें नष्ट हो रही हैं, मगर उसका कोई पुरसाहाल नहीं है। शिवद्वार और आस पास के इलाकों में दुर्लभ कलाकृतियों एवं मूर्तियों का भंडार विद्यमान है।
यह कलाकृतियां शिवद्वार, सतद्वारी, बर कन्हरा और आसपास के गांवों व सोढ़रीगढ़ किला में बिखरी थीं। आदिम सभ्यता के साक्षी इन धरोहरों को संरक्षित करने के लिए शिवद्वार से सटे आमडीह गांव में राजकीय संग्रहालय है।
यहां बड़ी संख्या में प्राचीन एवं मध्यकाल के ऐतिहासिक महत्व की खंडित-अखंडित दुर्लभ प्रतिमाओं व अन्य कलाकृतियों का संग्रह है। इनमें शिव, दुर्गा, यक्ष, यक्षिणियों, तंत्र मंत्र से संबंधित, धार्मिक चिह्न आदि शामिल हैं।
मूर्तियों को देखने से स्वतः ही स्पष्ट होता है कि सैकड़ों वर्ष पहले सोनभद्र जनपद का शिवद्वार क्षेत्र मूर्तिकला एवं शिल्पकला के क्षेत्र में कितना विकसित रहा है। शुभारंभ होने के बाद कुछ समय तक सही तरीके से संचालित हुआ, लेकिन इधर कई वर्षों से यह दुर्व्यवस्था का शिकार है।

धूल फांक रहा संग्रहालय

पूर्व में नगवां ब्लॉक के मऊ कला गांव में राष्ट्रीय संग्रहालय का निर्माण कराया गया था। हालांकि आदिवासी संस्कृति को संरंक्षित करने के उद्देश्य से निर्मित यह संग्रहालय शुरू से ही उपेक्षा का शिकार रहा है। संग्रहालय में खिड़की दरवाजे तक नहीं हैं। लंबे समय से इसका रंगरोगन भी नहीं कराया गया। लाखों के भवन धूल फांक रहा है।

मऊ कलां और शिवद्वार के आमडीह में बने संग्रहालय की देखरेख के लिए कोई कर्मचारी नहीं है। सुदूर इलाकों में स्थित संग्रहालय के संचालन में आ रही दिक्कतों के मद्देनजर जिला मुख्यालय के आसपास जमीन चिह्नित की जा रही है, जहां नए संग्रहालय का निर्माण किया जाना है। दोनों संग्रहालय में रखी वस्तुओं को इसमें सुरक्षित किया जाएगा। -डाॅ. रामनरेश पाल, क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी।
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