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Sonebhadra News: सुनियोजित विकास के लिए मास्टर प्लान बनाएगा नगर पालिका

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सोनभद्र। नगर के सुनियोजित विकास के लिए नगर पालिका अब खुद अपना मास्टर प्लान (महायोजना) तैयार करेगा। नए आवासीय और व्यावसायिक क्षेत्र तय होंगे। वहां की जरूरतों के आधार पर सड़कों, गलियों की चौड़ाई, पार्किंग स्थल, पार्क सहित अन्य सुविधाओं का विकास किया जाएगा। शासन से हरी झंडी मिलने के बाद नगर पालिका अब इसकी तैयारियों में जुट गया है। स्थानीय स्तर पर मास्टर प्लान बनाए जाने को विकास में तेजी और विवादों में कमी के लिए बेहतर कदम माना जा रहा है।
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राबर्ट्सगंज नगर व उससे सटे पांच किमी के दायरे (विनियमित क्षेत्र) के लिए बना मौजूदा मास्टर प्लान वर्ष 2011 में बनाया गया था। दस सालों के लिए बने इस मास्टर प्लान की वैधता 2021 में ही खत्म हो चुकी है। हालांकि नया मास्टर प्लान न बनने के कारण पुराने के आधार पर ही नगर में निर्माण कार्य चल रहे हैं। पिछले दस वर्षों में नगर के भौगोलिक स्वरूप में काफी बदलाव हुआ है। आसपास के 17 गांव अब नगरीय क्षेत्र में शामिल हो चुके हैं। आबादी बढ़कर दो गुना हो चुकी है। कई नई कॉलोनियां, सड़क, हाईवे का निर्माण हुआ है। इन तमाम बदलावों के साथ नगर को सुव्यवस्थित बसाने वाले नगर का मास्टर प्लान अभी पुराना ही है। वर्ष 2021 में मास्टर प्लान की वैधता खत्म होने के बाद से नया प्लान बनाने की कवायल शुरू की गई थी, जो अब तक पूर्ण नहीं हो पाई है। मास्टर प्लान बनाने का जिम्मा पहले टाउन प्लानर को सौंपा गया था। इसमें बदलाव करते हुए शासन ने नगर पालिका के माध्यम से ही मास्टर प्लान बनाने का निर्देश दिया है। नगर पालिका प्रशासन इसकी कवायद में जुट गया है। जलनिगम, पीडब्ल्यूडी, बिजली, प्रशासन, अग्निशमन, परिवहन, यातायात विभाग के अधिकारियों के साथ बैठकर उनके सुझावों के आधार पर नया मास्टर प्लान तैयार किया जाएगा। इसमें उन लोगों को भी शामिल किया जाएगा, जो नगर के बदलावों की अच्छी समझ रखते हैं और भविष्य को लेकर उनके पास अच्छे सुझाव भी हैं।
विवादों के समाधान में मिलेगी मदद
विनियमित क्षेत्र के दायरे में किसी भी तरह के निर्माण के दौरान निर्देशों का पालन नहीं किया जाता। लोग मनमाने ढंग से अपनी सहूलियत के अनुसार सड़क से सटाकर या नाली, गली की भूमि को नजरदांज कर निर्माण करते हैं। अलग-अलग विभागों के जमीन का चिह्नांकन न होने से बाद में यह विवाद का कारण बनते हैं। इसी तरह दुकान, शॉपिंग मार्ट, अस्पताल बनाने के दौरान भी पार्किंग के मानकों का पालन नहीं किया जाता। नगरीय क्षेत्र में बड़ी मात्रा में नजूल की भूमि है। खसरा रजिस्टर खोने के बाद इस भूमि पर जगह-जगह अतिक्रमण कर लिया गया है। स्थानीय स्तर पर मास्टर प्लान होने से ऐसे भूमि को चिह्नित कर आरक्षित करने और इससे जुड़े विवादों को सुलझाने में मदद मिलेगी।
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क्षेत्रों की प्राथमिकता के आधार पर होंगे कार्य
पिछले कुछ वर्षों में नगर का अनियोजित विकास बढ़ा है। कई नई कॉलोलियां बस गई हैं, जहां न तो पहुंचने के लिए सड़क है और न ही पेयजल, जलनिकासी और बिजली की सुविधा। स्थानीय स्तर पर मास्टर प्लान तैयार होने से नगर पालिका खुद ऐसे इलाकों को चिह्नित कर वहां प्राथमिकता के आधार पर विकास कार्यों की रुपरेखा तैयार कर सकेगी।
नगर पालिका के लिए स्थानीय स्तर पर मास्टर प्लान बनाने की मंजूरी मिल चुकी है। शीघ्र ही इस बारे में सभी संबंधित वर्गों की राय लेकर काम शुरू किया जाएगा। नगर की जरूरतों के अनुसार उसके सुंदरीकरण और सुनियोजित विकास का खाका खींचा जाएगा। -रुबी प्रसाद, चेयरमैन, नगर पालिका सोनभद्र।
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