मिर्जापुर जिले से विभाजित होकर चार मार्च 1989 को सोनभद्र जिला अस्तित्व में आया। उस समय राबर्ट्सगंज को अस्थायी तौर पर जिला मुख्यालय घोषित किया गया था। कामकाज भी यहीं से हो रहा था। पूर्व मंत्री विजय सिंह गोंड बताते हैं कि नेताजी का स्नेह सदैव उन्हें मिला। वर्ष 1989 में मैं निर्दलीय विधायक चुना गया था। तब नेताजी को समर्थन की जरूरत थी। नेताजी के कहने पर उन्हें समर्थन दिया।
वर्ष 1992 में मुलायम सिंह ने समाजवादी पार्टी का गठन किया, तब मैं जनता दल में चला गया था। मुलायम सिंह यादव ने उनसे सपा में शामिल होने की बात कही। उन्होंने मंत्री पद और हमेशा टिकट देने का वादा किया। उस समय जिला मुख्यालय का मामला चल रहा था। उन्होंने मुलायम सिंह यादव से पिपरी को जिला मुख्यालय बनाने की मांग रखी।
जुलाई 1994 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने रेणुकूट के हिंडाल्को फुटबॉल ग्राउंड में जनसभा की। वहीं पिपरी को जिला मुख्यालय बनाने की घोषणा करते हुए शिलान्यास भी कर दिया। तकरीबन एक वर्ष तक पिपरी में ही जिला मुख्यालय रहा।
हालांकि सत्ता परिवर्तन के बाद बसपा शासन में जिला मुख्यालय स्थायी रूप से राबर्ट्सगंज लोढ़ी शिफ्ट हो गया। मुख्यमंत्री बनने से पहले भी मुलायम सिंह यादव की सभा रेणुकूट में हुई है। इसके अलावा उनकी जनसभा राबर्ट्सगंज नवीन सब्जी मंडी परिसर, हाइडिल मैदान और आरटीएस क्लब राबर्ट्सगंज में हुई है।
डाला व चुर्क सीमेंट कारखाने पर फैसला लेकर मुलायम सिंह यादव को आलोचना झेलनी पड़ी थी। 1991 में मुख्यमंत्री रहते उन्होंने डाला सीमेंट फैक्ट्री को डालमिया को बेच दिया था। इसके बाद उपजे विरोध को दबाने के लिए दो जून 1991 को डाला सीमेंट कारखाना के कर्मचारियों पर गोली चलवानी पड़ी थी। गोलीकांड में करीब नौ कर्मचारियों की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद फैसला पलटना पड़ा था। हालांकि वर्ष 1999 में डाला व चुर्क सीमेंट कारखाना जेपी को बेच दिया गया। तब भी मुलायम की खूब आलोचना हुई थी।
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