ऊर्जांचल से मुगलसराय के सीधे जुड़ाव की लंबे समय से समझी जा रही जरूरत को देखते हुए इसकी पहल तेज हो गई है। उत्तर मध्य रेलवे के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी कंस्ट्रक्शन पीयूष अग्रवाल की ओर से इस लाइन के सर्वे के लिए टेंडर मंजूर कर लिया गया है। संबंधित सर्वे एजेंसी के जरिए इसके सर्वे का काम भी शुरू हो गया है। तीन से चार माह में सर्वे के साथ ही, कार्य की फिजिबिलिटी रिपोर्ट भी तैयार हो जाने की उम्मीद है। इसके बाद रेल लाइन के निर्माण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
राबर्ट्सगंज और मिर्जापुर के सांसद की ओर से 2014 में केंद्र में भाजपा सरकार के गठन के समय से ही राबर्ट्सगंज से होकर मधुपुर होते हुए मुगलसराय तक नई रेल लाइन बिछाने की मांग शुरू कर दी गई थी। वर्ष 2016 के रेल बजट में इस लाइन के सर्वे की घोषणा भी कर दी गई। इसके बाद सर्वे के लिए टेंडर प्रक्रिया अपनाते हुए, सप्ताह भर पूर्व टेंडर फाइनल भी कर दिया गया। इस कार्य की लागत लगभग तीन लाख रुपये रखी गई है। मुख्य प्रशासनिक अधिकारी कंस्ट्रक्शन पीयूष अग्रवाल ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि सोमवार से सर्वे कार्य शुरू भी हो गया है। पूरी कोशिश होगी कि जल्द से जल्द सर्वे के साथ ही प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार कराकर रेलवे बोर्ड को दे दी जाएगी।
उधर, सीपीआरओ आरडी वाजपेयी ने भी पहल तेज होने की बात स्वीकारी। बता दें कि इस लाइन के निर्माण से सिंगरौली, शक्तिनगर, रेणुकूट, चोपन, दुद्धी राबर्ट्सगंज के साथ ही छत्तीसगढ़ के बलरामपुर, झारखंड के गढ़वा का मुगलसराय से सीधा जुड़ाव तो होगा ही, इस लाइन के निर्माण से मुंबई, बंगलुरू की दूरी भी डेढ़ से दो सौ किमी कम हो जाएगी। इस लाइन से भविष्य में सोनभद्र होते हुए दोनों महानगरों के लिए ट्रेन संचालन की भी उम्मीद जग गई है।