सोनभद्र। गांवों में खेल प्रतिभाओं को तरासने के लिए खेल मैदान बनाने की पहल की गई थी। जिम्मेदारों की उदासीनता से इन मैदानों के साथ ही खेल कर दिया गया। मनरेगा के तहत बने खेल मैदान दुर्दशा के शिकार हैं। निर्माण के नाम पर इनकी बाउंड्री कर छोड़ दिया गया है। न तो जमीन समतल की गई और न ही अन्य सुविधाएं उपलब्ध कर्राईं गई। नतीजा कागजों में लाखों खर्च के बाद भी खिलाड़ियों को उसका कोई लाभ नहीं मिल रहा।
पं. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ग्रामीण विकास योजना के तहत नगवां ब्लाक के क्लस्टर गांव चेरुई, कोदई, पल्हारी में दस-दस लाख रुपये खर्च कर खेल मैदान का निर्माण कराया गया था। सुदूरवर्ती इलाके के इन गांवों में खेल मैदान बनाने के पीछे वहां की प्रतिभाओं को निखारने की मंशा थी। वर्ष 2020-21 में यह कार्य स्वीकृत हुआ था। इसके तहत खेल मैदान की बाउंड्री, समतलीकरण और अन्य खेल सुविधाएं उपलब्ध कराया जाना था। करीब दो साल बाद भी यह कार्य पूरे नहीं हो पाए हैं। पल्हारी गांव में चार फीट ऊंची बाउंड्री कर छोड़ दिया गया, जबकि कोदई और चेरुई में चारों तरफ से खंभे लगाकर काम ठप कर दिया। अंदर उबड़-खाबड़ जमीन खेलने लायक नहीं है। चेरुई में खेल मैदान के बीच से ही नाला गुजरा हुआ है। नतीजा बारिश होने पर नाला उफनाने पर पूरे गांव का पानी खेल मैदान में भर जाता है। ग्रामीणों के मुताबिक खेल मैदान चिह्नित करने के अलावा कोई कार्य नहीं हुआ। इसी तरह कोन ब्लाक के पुरानी बाजार में युवाओं के लिए ओपन जिम बनाने की पहल हुई थी। आधा अधूरा काम के बाद जमीन विवाद में मामला अटक गया है।
ग्रामीण खेलकूद को बढ़ावा देने के लिए नगवां ब्लाक में दस लाख रुपये से इंडोर हाल का निर्माण चल रहा है। पिछले तीन वर्षों में कई बार इसके लोकार्पण की प्रक्रिया शुरू की गई, लेकिन उससे पहले निरीक्षण में अनियमितता के चलते कार्यक्रम टालना पड़ा। हाल यह है कि अब तक युवा कल्याण विभाग को इसे हस्तांतरित ही नहीं किया जा सका है। पर्याप्त समय बीतने के बाद भी अग्नि सुरक्षा, बिजली सहित मरम्मत के अन्य कार्य अधूरे हैं।
बभनी। विकासखंड बभनी में बच्चों के खेलकूद के दो गांवों में खेल का मैदान बनाया गया है। राजकीय इंटर कॉलेज चपकी के प्रांगण में एक खेल का मैदान 2.99 लाख की लागत से मनरेगा के तहत बनवाया गया। वहीं विकास खंड के बरवें गांव में 2.29 लाख की लागत से खेल मैदान का निर्माण हुआ था। इंटर कॉलेज के खेल मैदान में तो गाहे-बगाहे प्रतियोगिताएं होती रहती हैं, लेकिन बरवे गांव का खेल मैदान केवल नाम के लिए ही है। मैदान झाड़ियों से पटा है। यहां कोई संसाधन मौजूद नहीं है। यह हाल तब है, जबकि आदिवासी बहुल इलाके में कब्बड्डी, तीरदांजी, वॉलीबाल के कई प्रतिभाएं मौजूद हैं।
मनरेगा या किसी अन्य मद से जहां भी खेल मैदान बनाए गए हैं, उन्हें दुरुस्त करने के लिए संबंधितों को निर्देशित किया जाएगा। अगर निर्माण में कहीं गड़बड़ी की गई होगी तो संबंधितों की जवाबदेही भी तय की जाएगी। -सौरभ गंगवार, सीडीओ।