आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायतों के निस्तारण में जिला फिसड्डी है। डीएम की लगातार सख्ती और कार्रवाइयों के बावजूद रैंकिंग में अपेक्षाकृत सुधार नहीं हो पाया है। इसके पीछे डिफाल्टर श्रेणी वाली शिकायतों की अधिकता को मुख्य वजह माना जा रहा है। फिलहाल रैंकिंग में सुधार और शिकायतकर्ताओं को संतुष्ट करने के लिए प्रशासन ने गांव समाधान दिवस के रूप में नई पहल की है। माना जा रहा है कि इससे स्थिति काफी हद तक सुधरेगी।
लंबे भौगोलिक क्षेत्रफल वाले जिले में भूमि विवाद से जुड़ी शिकायतें सर्वाधिक हैं। इनमें से तमाम मामले कोर्ट में भी विचाराधीन हैं। बावजूद भूमि पर कब्जे को लेकर विवाद जारी है। इन शिकायतों के निस्तारण के लिए लोग संपूर्ण समाधान दिवस, थाना समाधान दिवस और आईजीआरएस पोर्टल पर आवेदन कर रहे हैं। जांच-पड़ताल के दौरान जब मामला कोर्ट में होता है तो फिर कार्रवाई करने वाली टीम भी पीछे हो जाती है। लिहाजा पोर्टल पर डिफाल्टर श्रेणी की शिकायतों की संख्या बढ़ती जा रही है। यही कारण है कि शासन स्तर पर हुई समीक्षा में जिले की राबर्ट्सगंज, दुद्धी, घोरावल तहसील, पुलिस सहित अन्य विभागों के स्तर पर निस्तारण की प्रगति अच्छी नहीं मिली है। यह स्थिति तब है, जबकि डीएम लगातार आईजीआरएस पोर्टल पर आने वाली शिकायतों के निस्तारण में सख्ती बनाए हुए हैं। पिछले दिनों 19 अफसरों का वेतन रोकते हुए स्पष्टीकरण भी मांगा गया था। जून में पोर्टल की शिकायतों के निस्तारण के मामले में सोनभद्र सभी 75 जिलों में 69वीं रैंक के साथ बॉटम 10 में शामिल था। वहीं ताजा रैकिंग में इसे 36वां स्थान मिला है। जिलाधिकारी चंद्र विजय सिंह ने कहा कि पीड़ितों की समस्या का गुणवत्तापूर्ण ढंग से निस्तारण कराया जा रहा है। समग्र प्रयासों के चलते ही रैंकिंग 69 से घटकर 36 तक आई है। अब प्रत्येक सोमवार को ग्राम समाधान दिवस का भी आयोजन किया जा रहा है ताकि मौके पर गुणवत्तापूर्ण समाधान हो सके। जल्द ही रैकिंग में बेहतर स्थान दिखेगा।