सोनांचल में हुई बारिश से दलहन और तिलहन की तीस फीसदी से अधिक फसल नष्ट हो गई है। इन फसलों के दाने झड़ गए हैं। हवा और पानी से खेतों में खड़ी गेहूं की फसल भी गिर गई है।
सर्वाधिक नुकसान चोपन, घोरावल और राबर्ट्सगंज के किसानों को हुआ है। आर्थिक रूप से कमजोर किसानों की खेती प्रभावित होगी।
जिले में पिछले तीन दिनों से मौसम में आए बदलाव से जहां ठंडक ने एक बार फिर दस्तक दे दी है, वहीं किसानों को बड़ी क्षति पहुंचाई है।
अच्छी खेती का सपना संजोए किसानों के चेहरे पर फसलों की क्षति का असर स्पष्ट नजर आने लगा है। बारिश से खेतों में लहलहा रही दलहन और तिलहन की फसल लोट गई है।
तिलहन की सरसों और तीसी तथा दलहन की चना, मटर, मसूर और अरहर की फसल आधा से ज्यादा नष्ट हो चुकी है। कई क्षेत्रों में शनिवार की रात ओले पड़ने का भी सीधा असर इन फसलों पर पहुंचा है।
बारिश से अरहर के दाने झड़ गए हैं। किसानों का कहना है कि पकी फसलों की बालियां सूखने पर फट जाएंगी और उसके भी दाने झड़ जाएंगे।
इतना ही नहीं अब आर्थिक रूप से कमजोर किसानों की अगैती खेती भी प्रभावित होगी। वजह कि इसी फसल के ठीक ढंग से पैदा होने पर अगली खेती किसान और मजबूती से करते
लेकिन राबर्ट्सगंज, घोरावल और चोपन क्षेत्र में दलहनी, तिलहनी की फसलों के तीस फीसदी से ज्यादा चौपट होने का सीधा असर पडे़गा।
इस संबंध में जिला कृषि अधिकारी राजीव कुमार ने बताया कि उन्होंने पिछले तीन दिनों से हो रही बारिश से फसलों की क्षति का आंकलन कराया है। उनके मुताबिक करीब 30 फीसदी से ज्यादा फसलों को क्षति हुई है।
खलिहान में रखे अनाज भी प्रभवित हुए हैं। उन्होंने बताया कि जिले भर में सर्वाधिक नुकसान चोपन और चोपन ब्लाक क्षेत्रों में हुआ है। कुछ हद तक राबर्ट्सगंज क्षेत्र में भी फसलें प्रभावित हुई हैं।