वित्तीय वर्ष 2022-23 का आखिरी माह चल रहा है। ऐसे में केंद्र और प्रदेश सरकार की ओर से विकास कार्यों एवं योजनाओं के तहत मिले बजट को खपाने की जुगत में सरकारी विभाग जुट गए हैं। इसमें लोक निर्माण विभाग के साथ ही समाज कल्याण विभाग, सिंचाई, जिला पंचायत, स्वास्थ्य विभाग के साथ अन्य विभाग इसकी कवायद में जुटे हैं। इन विभागों में करोड़ों रुपये गत माह अवमुक्त हुए हैं। इससे काम कराने के लिए टेंडर सहित अन्य प्रक्रिया अपनाई जा रही है, ताकि धनराशि सरेंडर न करनी पड़े।
जिले में लोक निर्माण विभाग के तीन खंड है। इसमें लोक निर्माण विभाग का प्रांतीय खंड, निर्माण खंड और निर्माण खंड द्वितीय की तरफ से सड़कों का नवनिर्माण एवं मरम्मत कार्य कराया जाता है। इसके अतिरिक्त प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) भी ग्रामीण क्षेत्रों में नई सड़कों का निर्माण एवं मरम्मत का कार्य कराता है। विभागीय अधिकारियों की मानें तो चालू वित्तीय वर्ष में मिले धनराशि के सापेक्ष सारे कार्य कराए जा चुके हैं। इसमें गड्ढामुक्ति अभियान के कार्य हों या सड़कों के मरम्मत के कार्य। जिन कार्यों के लिए चालू वित्तीय वर्ष में धनराशि मिली है, उनका कार्य या तो पूरा हो गया है या कराया जा रहा है। हालांकि चालू वित्तीय वर्ष में मिले धन के सापेक्ष खर्च का ब्योरा बताने में संबंधित अधिकारी हिचक रहे हैं। उनका कहना है कि एक दो दिन में इसका ब्योरा पता करते बताया जाएगा। लोक निर्माण के तीनों खंडों में पुराने एवं नए कार्यो के लिए मिली धनराशि को खपाने के लिए हाल ही में टेंडर निकाले गए हैं। इसमें प्रांतीय खंड की तरफ से करीब दो दर्जन सड़कों का मरम्मत एवं नवीनीकरण कार्य कराया जाना है। इसी तरह निर्माण खंड एवं निर्माण खंड-2 में भी टेंडर की प्रक्रिया चल रही है। सिंचाई विभाग की तरफ से भी नहरों की सफाई के लिए टेंडर की पहले पूरी की जा चुकी है। बिजली विभाग में मिले धनराशि से संबंधित कार्य कराए गए हैं।
समाज कल्याण भी मिली धनराशि खपाने में जुटा
समाज कल्याण विभाग भी चालू वित्तीय वर्ष में मिली धनराशि को खपाने की जुगत में जुटा हुआ है। हाल ही में जिले में पढ़ाई कर रही जनजाति समाज की छात्राओं में ड्रेस एवं साइकिल वितरित करने के लिए वित्तीय वर्ष 2022-23 के लिए 46.80 लाख रुपये मिला है। समाज कल्याण विभाग की तरफ से जनजाति समाज की छात्राओं में साइकिल एवं ड्रेस वितरण के लिए मिले धन की खपत करने के लिए टेंडर की प्रक्रिया कराई जा रही है।
तकनीकी कारणों से नहीं खर्च कर पाए धनराशि
शासन से मिली धनराशि को कई विभाग तकनीकी कारणों के चलते भी खर्च नहीं कर सके हैं। इसमें बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग भी शामिल हैं। चालू वित्तीय वर्ष में विभाग को 83 नए आंगनबाड़ी केंद्रों का निर्माण कराने के लिए शासन ने तकरीबन 6.24 करोड़ रुपये जारी किए थे। एक आंगनबाड़ी केंद्र के निर्माण पर सात लाख 52 हजार रुपये खर्च होना था। मगर कार्यदायी संस्था ग्रामीण अभियंत्रण विभाग की तरफ से लागत कम बताते हुए चालू वित्तीय वर्ष में स्वीकृत आंगनबाड़ी केंद्रों का निर्माण कार्य करने से मना कर दिया गया। इसी तरह से कई अन्य विभागों में भी तकनीकी कारणों से बजट नहीं खर्च किया जा सका है।
चालू वित्तीय वर्ष में विकास कार्यो के लिए विभाग को कितना बजट मिला है, अब तक कितना खर्च हुआ है। इस ब्योरा देखने के बाद ही कुछ बताया जा सकता है। कई कार्यों के लिए टेंडर निकाले गए हैं। - शैलेश ठाकुर, एक्सईएन-पीडब्ल्यूडी प्रांतीय खंड।
अलग-अलग योजनाओं के लिए विभाग से बजट मिलता है। तय सीमा में योजनाओं पर धनराशि खर्च हो जाती है। इस नाते विभाग को धनराशि सरेंडर नहीं करना होता है। - आशुतोष श्रीवास्तव, अधीक्षण अभियंता-बिजली सोनभद्र।
चालू वित्तीय वर्ष में जनजाति समाज की छात्राओं में ड्रेस एवं साइकिल वितरित करने के लिए धनराशि मिली है। साइकिल एवं ड्रेस वितरण करने के लिए टेंडर निकाला गया है। - रमाशंकर यादव, जिला समाज कल्याण अधिकारी-सोनभद्र।