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Sonebhadra News: अपहृत बालक की हत्या के बाद फूटा गुस्सा, सड़क पर उतरे लोग, हाईवे जाम

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घोरावल। कोतवाली क्षेत्र के पेढ़ गांव से अपहृत नौ वर्षीय बालक की हत्या के बाद उग्र लोग सड़कों पर उतर आए। शुक्रवार की रात हंगामे के बाद शनिवार की सुबह लोगों ने घोरावल-मिर्जापुर मुख्य मार्ग पर चक्काजाम कर दिया। पुलिस-प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए आक्रोशित लोग हत्यारों पर सख्त कार्रवाई और शव को मौके पर लाने की मांग कर रहे थे। तनाव को देखते हुए एएसपी, एसडीएम, सीओ सहित कई थानों की फोर्स और पीएसी को मौके पर तैनात किया गया है। गुस्साए लोगों को शांत कराने के लिए पुलिस ने कई चक्र में बातचीत की कोशिश की लेकिन सफलता नहीं मिल पाई। सुबह नौ बजे से शुरू हुआ जाम शाम पांच बजे तक जारी था। पेढ़ गांव निवासी मंगल पाल का पुत्र अनुराग (9) को पांच मार्च की शाम चार बजे के करीब घर के बाहर साइकिल चलाते समय अपहरण कर लिया गया था। काफी तलाश के बाद भी बालक का कहीं पता न चलने पर छह मार्च को ग्रामीणों ने चक्काजाम किया तो पुलिस हरकत में आई। पिता की तहरीर पर गांव के तीन लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर पुलिस ने खोजबीन शुरू की। शुक्रवार को इस मामले में पुलिस ने दो नामजद आरोपियों को गिरफ्तार किया। इसके कुछ घंटे बाद ही मिर्जापुर जिले के चुनार कोतवाली क्षेत्र के बगहा गांव से बालक का शव बरामद हुआ। शव मिलने की सूचना पहुंचते ही ग्रामीण उग्र हो गए। मामले में लापरवाही का आरोप लगाते हुए रात में पुलिस पर पथराव भी किया। भारी फोर्स ने गांव पहुंचकर किसी तरह स्थिति संभाली। सुबह करीब नौ बजे ग्रामीण फिर आंदोलित हो गए। सैकड़ों की संख्या में लोगों ने गांव के सामने घोरावल-मिर्जापुर मुख्य मार्ग पर चक्काजाम कर दिया।
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जाम की सूचना पाकर एएसपी कालू सिंह, एसडीएम प्रभाकर सिंह, सीओ घोरावल संजीव कटियार, सीओ सिटी राहुल पांडेय सहित घोरावल, करमा, शाहगंज, जुगैल थाने की फोर्स और महिला पुलिस व पीएसी मौके पर पहुंच गई। अफसरों ने ग्रामीणों से वार्ता कर जाम खत्म कराने की कोशिश की लेकिन लोग मानने को तैयार नहीं थे। वह बालक के शव को मौके पर लाने, आरोपियों को मौत की सजा देने सहित अन्य मांग कर रहे थे। अभी एक जगह जाम समाप्त नहीं हुआ था कि मौके पर पहुंचे भीम आर्मी के जिलाध्यक्ष रविकांत के नेतृत्व में पार्टी कार्यकर्ताओं व ग्रामीणों ने वहां से करीब डेढ़ सौ मीटर दूर बाईपास चौराहे पर भी दोपहर एक बजे सड़क जाम कर दिया। इसी दौरान उधर से गुजर रहे रोडवेज बस को देखकर जाम लगाने वाले लोग आक्रोशित हो गए तो बस चालक ने सूझ-बूझ दिखाते हुए गाड़ी लेकर वापस लौट गया। दो-दो स्थानों पर शुरू हुआ जाम शाम पांच बजे तक जारी रहा। इस दौरान मुख्य मार्ग पर आवागमन ठप रहा। घोरावल नगर में मुक्खा मोड़ पर पुलिस ने वाहनों को डाइवर्ट कर दिया।
पुलिस के प्रति लोगों में था गुस्सा, ठहराते रहे जिम्मेदार
घोरावल। बालक अनुराग पाल के अपहरण और हत्या को लेकर जितना आक्रोश लोगों में आरोपियों के प्रति था तो पुलिस के रवैए को लेकर भी उनमें उतनी ही नाराजगी थी। लोगों का कहना था कि अगर पुलिस ने तत्काल सक्रियता दिखाई होती तो बालक की जान बच सकती थी। आरोपियों पर सख्ती की बजाय पुलिस शुरू से ही नरम रुख अपनाए रही। यही कारण रहा कि शुक्रवार की रात गांव पहुंची पुलिस को लोगों के गुस्से का कोपभाजन बनना पड़ा तो शनिवार को भी जाम स्थल पर लगातार पुलिस के खिलाफ ही नारे लगते रहे।
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जाम में शामिल लोगों का कहना था कि पांच मार्च को अनुराग के अपहरण की जानकारी होने पर मंगल जब सूचना देने थाने पहुंचे तो वहां तनिक भी गंभीरता नहीं दिखाई गई। अलबत्ता एक दरोगा ने उल्टे बालक को गायब करने का ही आरोप मढ़ दिया। जैसे-तैसे कड़ी मशक्कत के बाद मंगल की तहरीर पर तीन नामजद आरोपियों पर मुकदमा दर्ज भी हुआ तो उन्हें पकड़ने और बालक की तलाश में भी पुलिस सुस्त बनी रही। इसी से आजिज होकर लोगों ने छह मार्च को चक्काजाम भी किया। जाम के बाद पुलिस ने कुछ सक्रियता जरूर बढ़ाई, लेकिन आरोपियों पर सख्ती करने में हिचकती रही। मंगल लगातार उनसे कड़ाई करने की बात कहते रहे, मगर किसी ने ध्यान नहीं दिया। पुलिस यह मान रही थी कि बालक को सकुशल कहीं छिपाया गया है। उसका पूरा ध्यान होली संपन्न कराने पर था। होली बीतने के बाद पुलिस ने छानबीन तेज की। आरोपियों पर जैसे ही सख्ती दिखाई, उन्हें पूरा राज खोल दिया। लोगों का कहना था कि अगर सूचना मिलने के तत्काल बाद पुलिस ने सख्त रूख अपनाया होता तो शायद अनुराग की जान न जाती।
कहां गइलन हमार ललवा... ई का हो गइल...
घोरावल। पांच मार्च को अनुराग के अपहरण के बाद से ही पिता मंगल और मां मीना सहित परिवार के अन्य सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल था। हालांकि उनके मन में यह उम्मीद बनी हुई थी कि बेटा सकुशल घर लौट आएगा। शुक्रवार की शाम तक परिवार इसी उम्मीद में था कि जल्द अच्छी खबर मिलेगी, लेकिन देर रात करीब 10 बजे जब उन्हें शव मिलने की जानकारी हुई तो वह सन्न रह गए। मानों उनके पैरों तले जमीन ही खिसक गई। बेटे का नाम पुकारते हुए मां मीना बार-बार बेहोश हो जा रही थी। होश में आने पर उनके मुंह से यही शब्द निकल रहा था कि हमार ललनवा कहां गइलन, ई का हो गइल भगवान...।
मंगल पाल और मीना देवी की दो संतानों में अनुराग दूसरे नंबर पर था। बड़ी बेटी प्रीति सोनांचल कांवेंट स्कूल में कक्षा-तीन में पढ़ती है। इसी स्कूल में अनुराग यूकेजी का छात्र था। उनके अलावा परिवार में मंगल की मां भी हैं। मंगल जहां भाजपा के शक्ति केंद्र संयोजक और बजरंग दल की गांव इकाई के अध्यक्ष हैं तो पत्नी मीना भी महिला स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष हैं। इकलौते बेटे अनुराग की मौत ने उन्हें बेहाल कर दिया है। अपने बेटे की स्मृतियों को याद कर वह विलाप करते रहे। उन्हें संभालने में लगे पास-पड़ोस के लोग भी अपने आंसू नहीं रोक पा रहे थे। उनका करुण क्रंदन देख मौजूद हर कोई भावुक था तो उनमें आरोपियों के प्रति कड़ा गुस्सा भी बना रहा।
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