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UP: नाबालिग से दुष्कर्म...गर्भवती करने वाले पिता को अंतिम सांस तक कैद, 1.50 लाख का अर्थदंड; 35 दिन में फैसला

Thu, 12 Feb 2026 09:20 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, सोनभद्र।

सार

UP Crime: सोनभद्र के विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट की कोर्ट ने आरोप तय होने के बाद महज 35 दिन में सुनवाई पूरी की। चोपन थाने में अक्तूबर में पीड़िता के मामा ने एफआईआर दर्ज कराई थी। सात जनवरी को आरोप तय हुआ था। मां की मौत के बाद पीड़िता दो भाइयों संग पिता के साथ रह रही थी।
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विशेष न्यायाधीश पाक्सो एक्ट के तहत हुई कार्रवाई। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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Sonbhadra News: विशेष न्यायाधीश पाक्सो एक्ट अमित वीर सिंह की अदालत ने अपगी सगी बेटी के साथ दुष्कर्म और उसे गर्भवती करने वाले पिता को कठोर आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। बृहस्पतिवार को सुनवाई करते हुए अदालत ने इसे बेहद गंभीर अपराध मानते हुए दोषी पिता को शेष जीवन काल तक कारावास में रखने का आदेश दिया। उस पर 1.50 लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।

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जिले का यह पहला मामला है, जिसमें अदालत ने आरोप तय होने के बाद महज 35 दिन में सुनवाई करते हुए फैसला सुनाया है। इससे पहले पिछले वर्ष पाक्सो एक्ट के ही मामले में 54 दिन में सुनवाई पूरी की गई थी।
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अभियोजन पक्ष के मुताबिक कोन थाना क्षेत्र निवासी पीड़िता के मामा ने 27 अक्तूबर 2025 को चोपन थाने में तहरीर दी थी। अवगत कराया था कि मार्च 2025 में उसके बहन की मौत हो चुकी है। उसकी भांजी (15) और उसके दो भाई चोपन थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी पिता के साथ रहते हैं। सगे पिता ने अप्रैल 2025 को भांजी के साथ दुष्कर्म किया। 

पुलिस ने की कार्रवाई

इससे वह गर्भवती हो गई और उसके पेट में करीब 7 माह का बच्चा पल रहा है। तहरीर पर चोपन पुलिस ने पिता के विरुद्ध दुष्कर्म व पॉक्सो एक्ट में एफआईआर दर्ज कर विवेचना शुरू की। पर्याप्त सबूत मिलने पर विवेचक ने चार्जशीट दाखिल किया था। न्यायालय ने गत 7 जनवरी को आरोप तय किया था। 

मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं के तर्कों को सुनने, नौ गवाहों के बयान एवं पत्रावली का अवलोकन करने पर महज 35 दिन में पॉक्सो एक्ट में दोषी पिता (33) को कठोर कारावास और डेढ़ लाख रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। दोषी को उसके शेष प्राकृतिक जीवनकाल के लिए कारावास में रखने का आदेश दिया। अर्थदंड न देने पर 6 माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। अर्थदंड की धनराशि में से एक लाख 20 हजार रुपये पीड़िता को मिलेंगे।
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पीड़ित किशोरी ने दिया बेटी को जन्म
सोनभद्र। सरकारी वकील दिनेश प्रसाद अग्रहरि ने बताया कि पीड़ित किशोरी के पेट में 7 माह का बच्चा पल रहा था। लोकलाज के चलते गर्भपात कराने के लिए कोर्ट से अनुमति मांगी गई थी, लेकिन अनुमति नहीं मिली। इस वजह से मामले के विवेचक शिव प्रताप वर्मा की ओर से कोर्ट के आदेश पर पीड़िता को सीडब्लूसी की देखरेख में सुपुर्द कर दिया गया। गत 13 जनवरी को जिला अस्पताल में बच्ची पैदा हुई है। उन्होंने यह भी बताया कि डीएनए टेस्ट में भी दोषी और पीड़िता का बच्चा होना पाया गया है।
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