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सोन नदी में खनन पर्यावरणीय कानून, नदी दोनों की हत्या

Sat, 10 Nov 2018 12:29 AM IST
sonbhadra news
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बरहमोरी में गंगा सद़भावना यात्रा में शामिल लोग।
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म्योरपुर। जल पुरूष मैग्सेसे पुरस्कार प्राप्त राजेंद्र सिंह ने बृहस्पतिवार को बरहमोरी बालू साइट का निरीक्षण किया। यहां उन्होंने सोन नदी में हो रही खनन की जानकारी ली। इसके बाद उन्होंने पत्रकार वार्ता में कहा कि बरहमोरी में बालू साइट पर हो रहा खनन अवैध है। भारत सरकार की नदी नीति नदियों में माइनिंग की इजाजत नही देती है। नदियों में खनन संभव नहीं है। इस तरह की माइनिंग करना अवैध है।  
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उन्होंने कहा कि नदियों को बांध कर नदी में इस तरह का खनन करना नदी की हत्या के समान है। नदियों में मन मर्जी चाहे जहां पानी रोक देना फिर उनको रोड की तरह उपयोग करना और नदी में जहां-तहां गड्ढे खोदना यह एक तरह से नदी पर अतिक्रमण और उसका शोषण और उसका प्रदूषण बढ़ाने का तरीका है। भारत सरकार के कानूनों व सुप्रीम कोर्ट के नियमों का उल्लंघन है। एनजीटी ने जो निर्णय दिए हैं, जो भी प्रतिबंध लगाए हैं, उसकी सीधे-सीधे अवमानना है। भारत के पर्यावरणीय कानून और नदी का दोनों की हत्या है। माइनिंग नदी के बीचों-बीच हो रही है। वरिष्ठ सर्वोदयी कार्यकर्ता रामधीरज भाई ने कहा कि सरकार के सारे अधिकारी और कर्मचारी इसको देख रहे हैं। इतनी बड़ी सड़क एक दिन में तो बनी नही होगी, लेकिन फिर भी सरकार जिला प्रशासन इसको देख रहा है। उन्होंने कहा कि खनन से यह साबित होता है कि सरकार के मंत्री और अधिकारी मिले हुए हैं। उनकी सह पर अवैध खनन का खेल चल रहा है। इससे पूर्व गंगा सद्भावना यात्रा का भी आयोजन किया गया। इसके बाद ग्रामीणों ने जुलूस की शक्ल में बरहमोरी बालू साइड पर पहुंचकर हो रहे अवैध खनन का भी विरोध किया। इस दौरान बनवासी सेवा आश्रम की शुभा बहन समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
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