संशोधित... कोर्ट में पेशी के बाद इश्तियाक खान क़ो ले जाती पुलिस। स्रोत : वीडियो ग्रैब
सोनभद्र। कारोबारी पार्टनर से धोखाधड़ी के मामले में पिछले एक सप्ताह से फरारी काट रहे चर्चित खनन कारोबारी इश्तियाक खान को एसओजी टीम ने बुधवार को दोपहर बाद मुंबई से गिरफ्तार कर लिया। मुंबई शहर के चूनाभट्टी थानाक्षेत्र के प्रियदर्शिनी बस स्टैंड से गिरफ्तारी के बाद बुधवार की रात उसे सोनभद्र लाया गया। यहां पूछताछ के बाद बृहस्पतिवार की सुबह सिविल जज सीनियर डिवीजन/एफटीसी रवि रंजन मिश्रा की अदालत में पेश करते हुए रिमांड की मांग की गई। अदालत में करीब एक घंटे तक बहस हुई। इस दौरान अभियोजन और बचाव पक्ष ने अलग-अलग दलीलें पेश की। देर शाम अदालत ने पुलिस की अर्जी स्वीकार करते हुए इश्तियाक खान को 14 दिन की रिमांड पर जेल भेज दिया। मामले में बचाव पक्ष की ओर से जमानत अर्जी भी दाखिल की गई है, जिस पर शुक्रवार को सुनवाई होगी। ओबरा थानाक्षेत्र के बिल्ली मारकुंडी निवासी सुधीर श्रीवास्तव उर्फ गणेश ने पिछले वर्ष न्यायालय में प्रार्थना पत्र देकर इश्तियाक खां पर धोखाधड़ी और गबन का आरोप लगाया था। बताया था कि उनकी पत्नी रिंकी के नाम गिट्टी-बोल्डर (डोलोस्टोन) का छह अक्तूबर 2033 तक 10 वर्षीय खनन पट्टा जारी है। इस पट्टे के लिए वर्ष 2021 में मेसर्स राधिका इंडस्ट्रीज नामक फर्म का गठन किया गया था और इसके लिए रिंकी श्रीवास्तव का शेयर 19 प्रतिशत, अनुराग कुशवाहा का अंश 10 प्रतिशत, इश्तियाक खान की हिस्सेदारी 22 प्रतिशत, रितेश चौरसिया का हिस्सा 22 प्रतिशत, विकास प्रताप कुशवाहा की भागीदारी 19 प्रतिशत तय की गई थी, जिस जमीन पर पट्टा जारी किया गया, रिंकी उसकी खातेदार थीं। आरोप था कि पट्टा आवंटन के बाद इसके संचालन की जिम्मेदारी ओबरा के शिवनगर कॉलोनी निवासी इश्तियाक ने ली थी और इसका फायदा उठाते हुए रिंकी की जगह फर्म के नाम से कागजी कार्रवाई करते हुए कई जगहों पर कूटरचित व फर्जी दस्तावेजों का प्रयोग किया गया। फर्जी हस्ताक्षर और बड़ी हेराफेरी के भी आरोप लगाए गए। दावा किया गया कि इसकी जानकारी होने पर जब उन्होंने अपना आईडी-पासवर्ड मांगा तो देने से इन्कार कर दिया गया। एतराज करने पर देख लेने की धमकी दी गई। न्यायालय के आदेश पर 12 जुलाई 2025 को ओबरा थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। प्रकरण में अभियोजन पक्ष ने जहां आरोपी पर जांच में सहयोग न करने और बाहर भागने की फिराक में रहने का आरोप लगाया। वहीं बचाव पक्ष की दलील थी कि प्रकरण में हाईकोर्ट ने मध्यस्थता के लिए निर्देशित किया था लेकिन वह सफल नहीं हुआ। इसके बाद गलत तरीके से आरोपी बनाकर गिरफ्तारी की गई है। गिरफ्तारी के समय, तरीके पर भी सवाल उठाए गए। दावा किया गया कि सिर्फ कारोबारी प्रतिद्वंद्विता को आपराधिक रंग दे दिया गया, जबकि आरोपी ने किसी भी तरह का अपराध नहीं किया है। न्यायालय ने पाया कि प्राथमिकी में दर्शाए गए आरोपों के अलावा विवेचना में सामने आया है कि आरोपी ने रिंकी श्रीवास्तव का चेक पर फर्जी हस्ताक्षर बनाकर उसका इस्तेमाल किया। गबन का भी आरोप लगाया गया है। विवेचक का कथन है कि आरोपी विवेचना में सहयोग नहीं कर रहा था और वह बाहर भागने की फिराक में था। प्रकरण में अभी विवेचना जारी है। आरोपी के भाग जाने की भी आशंका जताई गई है। इससे जुड़े तथ्य और परिस्थिति के आधार पर आरोपी को न्यायिक अभिरक्षा में लिए जाने का आधार पर्याप्त है। इसलिए रिमांड की अर्जी मंजूर की जाती है। इश्तियाक की बुधवार की दोपहर बाद हुई गिरफ्तारी पर जहां घंटों सस्पेंस की स्थिति बनी रही। वहीं कभी कारोबारी भागीदार रहे पक्षों में ही आरोप-प्रत्यारोप की स्थिति पर तरह-तरह की चर्चाएं बनी रहीं। पुलिस ने बुधवार की दोपहर 3.15 बजे आरोपी के गिरफ़्तारी का दावा किया लेकिन पुलिस के आला अफसर इस मसले पर चुप्पी साधे रहे। प्रकरण में कथित लापरवाही के मसले पर तीन पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की चर्चाएं बनी रही लेकिन इस पर भी किसी टिप्पणी से अफसर बचते रहे। इश्तियाक के गिरफ्तारी की तब पुष्टि हुई जब पुलिस सुबह लगभग 11 बजे रिमांड के लिए उसे लेकर कोर्ट पहुंची। दोनों तरफ से अदालत में जमकर दलील पेश की गई। करीब एक घंटे की बहस के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित कर लिया था। इससे सस्पेंस देर शाम तक बना रहा। इस दौरान कचहरी परिसर में गहमागहमी की स्थिति रही। करीब साढ़े पांच बजे रिमांड मंजूरी के बाद इश्तियाक को कड़ी सुरक्षा में जेल ले जाया गया।