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15 गांवों के किसानों के साथ बैठक कर तय करेंगे आंदोलन की रणनीति

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सोनभद्र। सोनभद्र और चंदौली की सीमा पर बने धनकुआरी सिंचाई परियोजना से पानी लेने के लिए ग्रामीण लामबंद होने लगे हैं। मंगलवार को किसानों ने वनबहुआर गांव में बैठक की। इसमें निर्णय लिया गया कि सिंचाई के बाबत पानी लेने के लिए चरणबद्ध आंदोलन करेंगे। किसानों ने चेताया है कि वे अपना अधिकार लेकर रहेंगे।
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नगवां ब्लॉक के वन बहुआर गांव के किसानों ने मंगलवार को गांव में बैठक की और धनकुआरी सिंचाई परियोजना से सिंचाई के लिए पानी न मिलने पर चर्चा की। किसान रामवृक्ष और राजू का कहना था कि सरकार ने सोनभद्र और चंदौली जिले के पड़ोसी गावों को धनकुआरी सिंचाई योजना से पानी देने की योजना तैयार की थी। इसके लिए कर्मनाशा नदी पर सिंचाई परियोजना बनाई गई। सोनभद्र के 15 गांवों को पानी देना था लेकिन 2016 के बाद से किसी भी गांव को पानी नहीं दिया जा रहा है। यहां के लिए लगाए गए पांच पंप बंद कर दिये गए हैं। जबकि चंदौली जिले के गांवों को सिंचाई के लिए पानी दिया जा रहा है। यह अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
शंभू और आनंद ने कहा कि नगवां ब्लॉक के किसान कब तक सिंचाई के लिए परेशान होंगे। यहां नगवां डैम, कर्मनाशा नदी है लेकिन एक भी सिंचाई परियोजना नहीं है। धनकुआरी सिंचाई परियोजना बनी भी तो उसका लाभ यहां के किसानों को नहीं दिया जा रहा है। संबंधित अधिकारी भी इस पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। सोनभद्र के किसानों की उपेक्षा की जा रही है। यह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बैठक में किसानों ने निर्णय लिया कि यदि प्रशासन और जन प्रतिनिधि उनकी मांग पर सुनवाई नहीं करते हैं तो चरणबद्ध तरीके से आंदोलन किया जाएगा। इसके लिए सभी 15 गांवों के किसानों के साथ बैठक की जाएगी। बैठक में कयर, कल्लू, सोमारू, वीरेंद्र, नान्हक, सीताराम, गुड्डू, चुनी समेत अन्य किसान मौजूद रहे। बता दें कि धनकुआरी सिंचाई परियोजना से नगवां ब्लॉक के 15 गांवों को सिंचाई के लिए पानी दिया जा रहा था लेकिन वर्ष 2016 से पानी देना बंद कर दिया गया है। इससे किसान बारिश आधारित कृषि के लिए विवश हैं। सदर विधायक ने किसानों की इस समस्या को गंभीरता से लेकर अधिकारियों से वार्ता करने की बात कही है। उन्होंने कहा है कि परियोजना से संबंधित रिकार्ड सिंचाई विभाग के अधिकारियों से मांगा गया है।
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