कंदवा के घोसवा में शिव महापुराण कथा सुनते श्रद्धालु। संवाद
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भगवान शिव प्रतिकूलता में भी अनुकूलता का अनुभव करने वाले देवता हैं। भगवान शिव अमंगल वेश में रहते हैं किंतु मंगल के देवता गणेश के पिता हैं। धर्म को हमेशा आगे रखना चाहिए।
यह बातें घोसवा स्थित सर्वानंद तीर्थ सरोवर पर चल रहे शिव महापुराण कथा के दौरान सुशांत मुनी ने सोमवार की शाम भगवान शिव के बारे में कहीं। कहा कि शिव जी बैल का पूंछ पकड़कर अपनी ससुराल गए क्योंकि बैल धर्म का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि मनुष्य को हर परिस्थिति में धर्म का सहारा लेना चाहिए। विश्व कल्याण के लिए भगवान शिव ने पार्वती से विवाह कर देवताओं व मनुष्यों को अभयदान दिया। पति की सेवा ही नारी का सर्वोत्तम धर्म है। पति की सेवा करने से पत्नी को परम धाम की प्राप्ति होती है।
जहां तक हो सके वाणी, शरीर और मन से सदा संसार का भला सोचना और करना चाहिए। कहा कि राजा हिमालय की पुत्री उमा ने भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए पर्वतों पर 88 हजार वर्ष तक घोर तपस्या की थी। इससे उनका एक नाम पार्वती पड़ गया। सर्दी, गर्मी, वर्षा और भूख-प्यास की परवाह किए बिना वह तपस्या में लीन रहती थीं।
भगवान शिव पार्वती की तपस्या की परीक्षा तरह-तरह से लेकर कहते हैं कि वह उनसे विवाह करके परेशान रहेगी लेकिन पार्वती अटल रहती हैं। अंत में शिव को पार्वती के निर्णय का सम्मान करना पड़ा और वे विवाह के लिए राजी हो जाते हैं। इस दौरान अनूप सिंह, पप्पू सिंह, हरदेव सिंह, बंटी सिंह आदि रहे।