बहुउद्देशीय कनहर सिंचाई परियोजना के स्पेलवे कंक्रीटिंग का गुरुवार को लखनऊ से आई ज्योजिकल सर्वे ऑफ इंडिया की तीन सदस्यीय टीम ने निरीक्षण किया।
जांच के दौरान निर्माण में कमजोर पत्थर और मिट्टी का प्रयोग पाया गया। गुरुवार की सुबह 11 बजे कनहर परियोजना निर्माण स्थल पर पहुंचे टीम के डायरेक्टर महेश चंद्र उपाध्याय एवं भूगर्भ शास्त्री रवि नेगी तथा भारती ने स्पेलवे में हो रहे कंक्रीटिंग की जांच की।
टीम ने पूरे 17 ब्लॉकों का गहनता से निरीक्षण कर स्पेलवे के तीन व चार ब्लॉक की जांच की। जांच के बाद डायरेक्टर महेश चंद्र उपाध्याय ने बताया कि स्पेल्वे निर्माण में कमजोर पत्थर और मिट्टी का प्रयोग धड़ल्ले से हो रहा है।
स्पेल्वे की पहली जांच में ही कमजोर पत्थर पाए जाने से बांध के निर्माण पर प्रश्र चिह्न लगना शुरू हो गया है। परियोजना के अधीक्षण अभियंता एसएनपी सिंह ने बताया कि भूगर्भ जांच टीम के तीन सदस्यीय दल ने कनहर परियोजना के जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम तीन दिवसीय दौरे पर अमवार पहुंची है।
बताया कि टीम स्पेल्वे कंक्रीटिंग, पत्थर, गिट्टी, मिट्टी के अलावा नहर, सुरंग आदि बांध से संबंधित जांच करेगी। इस मौके पर अधिशासी अभियंता हेमंत वर्मा, अवर अभियंता रामरतन, कार्यदाई संस्था के धर्मराज, ए राजन, संतोष वर्मा, राजेश, विमलेश आदि रहे।
कनहर सिंचाई परियोजना अमवार में हो रहे स्पेलवे निर्माण तथा डूब गांवों की गतिविधियों को गुरुवार को दोपहर में ड्रोन कैमरे में कैद किया गया।
हैदराबाद से लाए गए कैमरे से सिंचाई विभाग के टीम ने कोरची, भिसुर, सुंदरी, कुदरी सहित कई डूब गांवों की तस्वीरें जैसे रहन-सहन, जंगल, पशु-पक्षी आदि की तस्वीरें कैद की गई।
टीम में शामिल लक्ष्मण और एपीआरके राजू ने बताया कि स्पेलवे निर्माण की पहली तस्वीर के साथ डूब गांव की रहन-सहन की तस्वीरें कैद की गई हैं।
इन तस्वीरों को रिकार्ड के तौर पर रखा जाएगा तथा उत्तर प्रदेश शासन को भेज कर वर्तमान वस्तुस्थिति से अवगत कराया जाएगा। बताया कि कार्यदाई संस्था अपने कार्यालय पर स्पेलवे व डूब गांव की तस्वीर सुरक्षित रखेगा।