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भारतीय संस्कृति को बचाने के लिए गंगा पर कानून जरूरी: राजेंद्र

Wed, 07 Nov 2018 08:15 PM IST
sonebhadra news
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प्रेम भाई के श्रद्धांजलि में शामिल लोग।
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म्योरपुर। जिले के गोविंदपुर स्थित बनवासी सेवा आश्रम पहुंचे जलपुरुष राजेंद्र सिंह राणा ने बुधवार को कहा कि गंगा कोई साधारण नदी नहीं हम सब की मां है, भारतीय संस्कृति की हिस्सा है। मां को बचाने के लिए देशवासियों को आगे तो आना ही होगा। केंद्र-राज्य सरकार को भी चाहिए कि वह गंगा पर कानून बनाए ताकि भारतीय संस्कृति के अभिन्न अंग गंगा के संरक्षण के साथ उसकी अविरलता कायम हो सके। अपने तीर्थ गुरू प्रेम भाई को श्रद्धांजलि दी और गंगा सद्भावना यात्रा की अगुवाई करते हुए गंगा के गंगत्व का बखान किया।  
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बुधवार की सुबह हुए कार्यक्रम में सबसे पहले स्व. प्रेम भाई के पुण्यतिथि पर सर्वधर्म प्रार्थना की गई। इसके बाद जल पुरुष राजेंद्र सिंह राणा, आश्रम कार्यकर्ताओं, जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। इसके साथ ही गंगा सद्भावना यात्रा निकालकर गंगा के महत्व पर चर्चा की गई। मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित और जल पुरुष के नाम से ख्यात राजेंद्र राणा ने कहा कि 25 साल की उम्र में प्रेम भाई ने मुझे नदियों पर काम के लिए प्रेरित किया। कहा कि वे मेरे गुरु रहे और आश्रम मेरा धर्मतीर्थ स्थल है। स्वामी सानंद की मांग का समर्थन करते हुए कहा कि संस्कृति और भारतीय आत्मा को जिंदा रखने के लिए गंगा पर कानून बनाना आवश्यक है। क्योंकि अविरलता से ही गंगा की निर्मलता संभव है, जिसे सरकार अनदेखा कर रही है।  कहा कि स्वामी सानंद ने मां गंगा के लिए प्राण त्याग दिया यह उनकी बड़ी जीत है, क्योंकि उसके बाद पांच संत सत्याग्रह पर बैठ गए हैं और लोगों को जगाने के लिए गंगोत्री से गंगा सागर तक यात्रा पर निकले हैं। रामधीरज ने जिले के नदियों की दुर्दशा पर चर्चा की। आह्वान किया कि  लोग अपने स्तर से उपवास ,सत्याग्रह, चर्चा, बैठक, गीत के माध्यम से भी मांग को बल दे सकते हैं। इस मौके पर शुभा प्रेम, डॉ. विभा, सुभाष शाही, उमेश चौबे, नीरा, अभय सिंह, दिनेश, दीपक सिंह, बिट्टू, अमरकेश सिंह, देवनाथ, प्रदीप, प्रेमनारायण, रविंद्र जायसवाल आदि उपस्थित रहे।
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