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राजस्थान से छत्तीसगढ़ पैदल ही चल दिए श्रमिक

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राजस्थान से छत्तीसगढ़ पैदल ही चल दिए श्रमिक
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रास्ते में श्रमिकों के लिए ट्रेलर बना सराहा
संवाद न्यूज एजेंसी
बभनी। काश हम मजदूरों के दु:ख को सभी लोग समझ पाते। हम मजबूर है, इसलिए मजबूर हैं हूजुर। छत्तीसगढ़ से राजस्थान कमाने गये मजदूर अपनी बीती व्यथा सुनाने लगे। राजस्थान से 42 की संख्या में मजदूर कभी ट्रक तो कभी ट्रेलर कभी पैदल ही चलकर सोमवार को रात दस बजे बभनी पहुंचे। छत्तीसगढ़ बिलासपुर निवासी सूरज, बलन्दर, बबलू, नीतिश, नवल, रामकली, हरभजन ने बताया कि हम लोग पांच दिन पहले राजस्थान से चले हैं। किसी प्रकार से विभिन्न साधनों से तथा पैदल चलकर यहां तक पहुंचे हैं। दो दिन से भोजन भी नसीब हुआ है। सभी मजदूरों को रोक कर रात में भोजन कराया गया। इसके बाद सभी लोगों को बस से छत्तीसगढ़ बार्डर आसनडीह तक भेजा गया। बलंदर ने कहा हुजूर काश हम मजदूरों के दु:ख दर्द को कोई समझ पाता। इस संकट की घड़ी में हम लोगों पर क्या गुजर रहा है। इसका जो भी बयां किया जाये वह कम ही होगा। अब तो किसी प्रकार से अपने घर पहुंच जायें, यही अभिलाषा बची है। बता दें कि लॉकडाउन में राजस्थान, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, उड़ीसा से मजदूरों का आवागमन निरंतर जारी है। सोमवार को भी छत्तीसगढ़ बार्डर से सैकड़ों लोगों को बसों से क्वारंटीन सेंटर भेजा गया। वहां से सभी मजदूरों को उनके घरों तक भेजवाने का काम प्रशासन कर रहा है। सेवा समर्पण संस्थान सेवाकुंज आश्रम के प्रांत सह संगठन मंत्री आनंद भाई ने कहा कि कोई भी मजदूर पैदल नहीं जायेगा। शासन ने काफी संख्या में बसों को लगाया है और उनको लगातार छोड़ा जा रहा है।
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