कनहर सिंचाई परियोजना के निर्माण के विरोध में विस्थापितों का धरना शुक्रवार को चौथे दिन भी जारी रहा। शुक्रवार को तेतरी देवी की अध्यक्षता में धरना हुआ। परियोजना के बांध निर्माण स्थल पर विरोधियों को पहुंचने से रोकने के लिए वहां कटीले तारों से घेराबंदी कर दी गई है।
एडीएम और एएसपी निर्माण कार्य की निगरानी में मौके पर डटे हैं। कनहर सिंचाई परियोजना निर्माण को लेकर तनाव के बीच जिला प्रशासन और बांध परियोजना के अधिकारियों ने विरोधियों से निबटने का नया रास्ता अख्तियार किया है। विस्थापितों के विरोध के चलते निर्माण कार्य प्रभावित न हो, इसके लिए प्रशासन ने बांध निर्माण क्षेत्र की घेरेबंदी करा दी है।
दिन और रात काम कराकर दो दिन में प्रशासन ने पूरे बांध निर्माण क्षेत्र को कटीले तारों से घेरवा दिया है ताकि कोई भी व्यक्ति प्रतिबंधित क्षेत्र में बिना अनुमति प्रवेश न कर सके। मौके पर मौजूद एडीएम मनीलाल यादव के मुताबिक, निर्माण कार्य बिना किसी रोकटोक के कराया जा रहा है।
सुरक्षा की दृष्टि से कटीले तार लगाए गए हैं। उनके मुताबिक, ब्लास्टिंग की सीमा निर्धारित कर दी गई है और ब्लास्टिंग लगातार कराई जा रही है। इस नाते घेरेबंदी कराई गई है। उधर, नदी के उस पर पांगन नदी के किनारे विस्थापितों का धरना शुक्रवार को चौथे दिन भी जारी रहा। धरना दे रहे विस्थापित पिछले दिनों प्रशासनिक अफसरों पर हुए हमले के मामले में दर्ज एफआईआर को वापस लेने की मांग पर अडे़ हुए हैं।
शुक्रवार को धरने की अध्यक्षता कर रही तेतरी देवी का कहना था कि परियोजना का निर्माण असंवैधानिक है, इसलिए उसे तत्काल बंद कराया जाना चाहिए। विस्थापितों को वर्ष 2013 की नीति के अनुसार मुआवजा दिया जाए और विस्थापितों पर दर्ज मुकदमा वापस लिया जाए, तभी धरना समाप्त होगा।
धरना में रामआधार, मोती यादव, राजेश, राजू जायसवाल, फूलकूंवर, कलावती, रजमतिया समेत भारी संख्या में विस्थापित मौजूद रहे। उधर, अफसरों पर हुए मामले में अब तक एक भी आरोपी को पुलिस गिरफ्तार नहीं कर सकी है। निर्माण स्थल पर एडीएम मनीलाल यादव, एएसपी रामयज्ञ, एसडीएम सदर राजेंद्र प्रसाद तिवारी, सीओ सदर सच्चिदानंद, कोतवाल कपिलदेव यादव के साथ कई थानों की फोर्स मौजूद रही।