एनटीपीसी रिहंद में शुक्रवार को कथा एवं उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद की जयंती मनाई गई। इसके उपलक्ष्य में राजभाषा अनुभाग की ओर से प्रशासनिक भवन स्थित सम्मेलन कक्ष में शाम को गोष्ठी, कहानी पाठ और क्विज प्रतियोगिता का आयोजन हुआ।
कार्यक्रम में बूढ़ी काकी, नमक का दारोगा सरीखे कई पात्र जीवंत हुए, इस दौरान लोगों की आंखें नम हो गई।
मुख्य अतिथि महाप्रबंधक टीएस राजकुमार ने मुंशी प्रेमचंद के चित्र पर माल्यार्पण और श्रद्धा सुमन अर्पित कर कार्यक्रम की शुरुआत की। कहा कि मुंशी प्रेमचंद युगद्रष्टा तथा राष्ट्रचिंतक थे।
साहित्यकार डा. दिनेश दिनकर ने कहा कि प्रेमचंद की लेखनी में भारत के नवजागरण का शंखनाद था। विशिष्ट अतिथि केंद्रीय विद्यालय के हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ चंद्रजीत यादव ने कहा कि प्रेमचंद की रचनाओं में जीवन आदर्श और यथार्थ का अद्भुत संयोग है।
बूढ़ी काकी, कफन कहानी में संवेदना के न जाने कितने जीवन पाठ हैं। सहायक प्रबंधक एफईएस रूबी सचान ने नमक का दारोगा, उप महाप्रबंधक एचआर रवींद्र कुमार मल्होत्रा ने ईदगाह के कहानियों का जिक्र कर यथार्थ का बोध कराया।
उनकी कहानियों एवं उपन्यासों पर आधारित प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता हुई, जिसमें प्रबंधक प्रचालन मुकेश कुमार प्रथम, प्रबंधक टीएमडी रामतौल द्वितीय, केमिस्ट्री विभाग के अधिकारी सुबोध कुमार सिन्हा को तृतीय तथा आशा राम जूनियर को सांत्वना पुरस्कार से नवाजा गया।