इसमें अधिकांश बसें निर्धारित किलोमीटर से अधिक चल चुकी है। हालांकि उम्र पूरा नहीं होने से इन रोडवेज बसों का संचालन नियमित रूप से किया जाता है, मगर रक्षाबंधन की पूर्व संध्या पर ग्रामीण रूटों का बसों का संचालन नहीं किया गया। परिवहन निगम की तरफ से पूर्व की भांति रॉबर्ट्सगंज से खलियारी और घोरावल मार्ग पर एक-एक बस का ही संचालन किया गया, जिसके इंतजार में बड़ी संख्या में महिलाएं धर्मशाला चौक पर बैठी रहीं।
रोडवेज बस पहुंचते ही यात्रियों से भर गई। रोडवेज बस स्टेशन में कोन और विंढमगंज जाने वाले बड़ी संख्या में यात्री बस का इंतजार करते रहे। अतिरिक्त बसों का संचालन नहीं होने से महिला एवं पुरुष यात्रियों को तीन से चार घंटे तक इंतजार करना पड़ा।
जिम्मेदारों को कोसते रहे यात्री
रोडवेज प्रशासन की दुर्व्यवस्था से यात्री बेहाल नजर आए। करीब सवा दो बजे तेलगुड़वा होते हुए कोन-विंढमगंज जाने वाली रोडवेज बस पहुंची। वहीं ढ़ाई बजे हाथीनाला, दुद्धी होते हुए विंढमगंज जाने वाली रोडवेज बस आई। दोनों बसों के आते हुए यात्रियों से भर गई। स्थिति यह रही कि धक्का-मुक्की के बीच लोगों को सफर तय करना पड़ा। लंबी दूरी और महत्वपूर्ण ग्रामीण रूटों पर अतिरिक्त बसों का संचालन नहीं होने से यात्री व्यवस्था को कोसते नजर आए।
यात्रियों का कहना था कि यदि बसें उपलब्ध थीं तो उनका ग्रामीण मार्गों पर संचालन क्यों नहीं किया गया। स्टेशन परिसर में बसों के खड़े रहने और दूसरी ओर यात्रियों के परेशान होने से रोडवेज प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल भी खड़े हुए। यात्रियों ने रोडवेज प्रशासन से रक्षाबंधन के मद्देनजर आगामी दो दिन चलने वाली निशुल्क बसों का संचालन सभी रुटों पर किए जाने की मांग की है। ताकि रक्षाबंधन के पर्व पर यात्रियों को अनावश्यक परेशानी न उठानी पड़े।