इलाके में मानसून की पहली बारिश ने जरहा अंजीर नदी पर बनी अस्थाई पुलिया की पोल खोल दी है। बाईपास मार्ग पर खानापूर्ति कर बनाए गए कच्चे पुल के धंसने से बीते दो दिनों से भारी वाहनों की लंबी कतारें लगी हैं।
सबसे ज्यादा दिक्कत एफजीडी निर्माण कार्य के लिए जा रहे जरूरी सामान लदे ट्रेलरों को हो रही है, जो कीचड़ और जलभराव में फंसकर रह गए हैं। रोडवेज की बसें भी प्रभावित हैं।
नवनिर्मित पुल से छोटे वाहन और बसों का आवागमन तो किसी तरह शुरू हो गया है, लेकिन भारी वाहनों के लिए अब भी राह नहीं खुल सकी है।
ठेकेदार की ओर से अस्थाई रूप से बनाए गए बाईपास का रास्ता बारिश के बहाव और दलदल में तब्दील हो जाने के कारण अब लोड नहीं ले पा रहा है।
क्षेत्रवासियों का कहना है कि यदि ठेकेदार और निर्माण एजेंसी समय से पुल निर्माण कार्य को पूरा कर देते तो यह नौबत न आती। स्थानीय लोगों ने पुल निर्माण कार्य में लापरवाही का आरोप लगाया है।
उनका कहना है कि नेमना में बन रहे पुल का काम समय से पूरा हो गया, जबकि जरहा में विभाग की लापरवाही से समस्या विकराल हो गई है। बकरिहवा से बीजपुर तक की सड़क भी अब खस्ताहाल हो चुकी है।
जगह-जगह कटाव और जलजमाव से आवागमन खतरे से खाली नहीं है। हाल ही में सड़क पर गड्ढों के कारण एक यात्री बस का कमानी पट्टा टूट गया, जिससे यात्रियों की जान जोखिम में आ गई।
इसके बावजूद पीडब्ल्यूडी के अधिकारी अब तक मूकदर्शक बने हुए हैं। पुल की खराब स्थिति के कारण बनारस और मिर्जापुर की ओर चलने वाली रोडवेज बसों का संचालन भी प्रभावित हो गया है।
बसों को अब बकरिहवा होते हुए वैकल्पिक मार्ग से चलाया जा रहा है, जिससे बीजपुर परियोजना क्षेत्र और आसपास के यात्रियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। लोगों ने चेताया है कि यदि शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।
रोडवेज बसों को आगे भेजने में डिपो को कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन जरहा पुल के कारण बसों को आवागमन में दिक्कत हो रही है। इसके मद्देनजर बसों को बकरिहवा होते हुए ही चलाया जा रहा है। पुल से मार्ग ठीक होने के बाद ही बसों का संचालन दोबारा शुरू किया जाएगा।
-विश्राम, सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक सोनभद्र डिपो।