विधानसभा चुनाव में इस बार पानी, बिजली, स्वास्थ्य सेवाओं, सड़क और जनपद को पर्यटन के मानचित्र पर लाने के मुद्दे उठाए जा रहे हैं। खासकर बिजली आैर शिक्षा को लेकर लोगों में अपने जनप्रतिनिधियों के प्रति असंतोष है। इसमें भी वह इलाके जो शहरी से खासे कटे हुए हैं। जनपद के अति नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के लोग भी अब शिक्षा, खासकर तकनीकी शिक्षा को लेकर जागरूक हो रहे हैं। उन्हें बच्चों के लिए ऐसी शिक्षा चाहिए जो सीधे रोजगार से उन्हें जोड़ सके। यह बात उनके जेहन में चकरिया में अधूरी हालत में बंद पड़े आईटीआई कालेज को देखकर पैदा हुई। लोगों का कहना है कि वे कॉलेज को चालू कराने को लेकर मतदान करेंगे।
कभी नक्सलियों का गढ़ रहे सोनभद्र की सीमावर्ती गांवों में विकास की स्थिति शूून्य थी। लेकिन सरकारों ने यह माना कि क्षेत्रों के पिछड़ेपन और नक्सल गतिविधियों के पनपने की मूल वजह अशिक्षा और गरीबी है। इसको ध्यान में रखकर केंद्र और प्रदेश सरकार ने नक्सल उन्मूलन योजना के तहत विकास कार्य कराना शुरू किया। सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा, चिकित्सा समेत अन्य क्षेत्रों में कार्य तो हुए लेकिन इस तरह नहीं हुए कि उसका लाभ आम लोगों को मिल सके। जिले में कई जगहों पर आईटीआई कालेज का निर्माण कराया गया।
इसी के तहत नगवां ब्लॉक के अति नक्सल प्रभावित गांव चकरिया में 60 लाख रुपये की लागत से आईटीआई कालेज बना। करीब तीन साल पूर्व बने इसके भवन अब बेकार साबित हो रहे हैं। भवन की खिड़कियों के शीशे टूट गए हैं। कालेज में तैनात किये गए स्टाफ को दुद्धी आईटीआई कालेज से संबद्घ कर दिया गया। यहां पढ़ाई नहीं होती और यह शो पीस बना पड़ा है।
अब इसको नक्सल क्षेत्र के लोगों ने गंभीरता से लिया है और आईटीआई कालेज जल्द चालू कराने को चुनावी मुद्दा बना दिया है। चकरिया के जगदीश, महंगू, रवि, शिवशंकर, अमित, देवकुमार और राम किशुन का कहना है कि एक तो नक्सल क्षेत्र में शिक्षा की कमी है। दूसरे यदि शिक्षा के क्षेत्र में काम भी हुआ तो उसका कोई मायने नहीं है। ग्रामीणों ने चेताया है कि यदि मतदान के पहले तक आईटीआई कालेज को चालू कराने का भरोसा नहीं दिलाया जाता है तो इस बार मतदान इसी मुद्दे को ध्यान में रखकर किया जाएगा।