ग्रीन यूपी-क्लीन यूपी के तहत 24 घंटे में पांच करोड़ पौधे लगाकर कीर्तिमान बनाने की बनाने की बधाई भले सरकार ले रही हो लेकिन न जिले में पौधरोपण को लेकर हकीकत कुछ और ही है। यहां रोपण के बजाय पौधों को इधर-उधर फेंक दिया गया है। गड्ढा तक नहीं खोदा गया है। मांचीऔर रामगढ़ वन रेंज में जहां-तहां पड़े सूख रहे पौधे अभियान की हकीकत बयां कर रहे हैं। यदि सच की जांच हुई तो गिनीज बुक में नाम दर्ज कराने के प्रयास को झटका लग सकता है।
उत्तर प्रदेश सरकार ने 24 घंटे में पांच करोड़ पौधे रोपकर गिनीज बुक आफ वर्ल्ड रिकार्ड में नाम दर्ज कराने की योजना बनाई थी। इसके लिए जिलेवार पौधरोपण की जिम्मेदारी सौंपी गई और लक्ष्य भी निर्धारित कर दिये गए। वन विभाग के उच्चाधिकारियों के साथ ही प्रशासनिक अफसर इस अभियान की मानीटरिंग भी कर रहे थे।
11 जुलाई से 12 जुलाई तक सोनभद्र में 30 लाख पौधे लगने थे। प्रशासन ने इस लक्ष्य को हासिल कर लेने का दावा भी कर लिया। लेकिन जमीनी हकीकत की जांच की जाए तो सच्चाई खुलकर सामने आ जाएगी।
अमर उजाला टीम नगवां ब्लॉक के मांची वन रेंज के सूअरसोत बीट पर गई तो यहां सैकड़ों पौधे जहां-तहां फेंके पड़े मिले। गड्ढे तक नहीं खोदे गए। कहीं कहीं पौधे जमीन पर ही रखकर पौधरोपण की रस्म निभा दी गई। काफी देर बाद मौके पर वन दरोगा लवकुश प्रसाद पहुंचे। उनसे फेंके गए पौधों के बारे में पूछा गया तो बोले, अभी लग रहा है।
रेंजर मांची मोहतसीम अली से फेंके गए पौधों के बारे में पूछने पर उन्होंने किसी तरह का जवाब देने से ही इनकार कर दिया। रामगढ़ वन रेंज के चरकोनवा, सिलहट, किरहुलिया, केवटम, ढोसरा, मझुई, सोमा, पनौरा, पथरकुआं सहित कई इलाकों में पौधरोपण में मनमानी गई है। प्लास्टिक के थैले में मिट्टी थी ही नहीं। पौधरोपण का कोरम कर दिया गया।
केतार गांव निवासी गुड्डू का कहना है कि पौधे लगाने के नाम पर सिर्फ मनमानी हुई है। यहीं के पप्पू कहते हैं कि अवैध कटान, अवैध कब्जे पर रोक से जंगल पुन: तैयार हो जाएगा। पौधरोपण के नाम पर कोरम किया जाना पर्यावरण हित में नहीं है।