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जो जिद कर रहा उसे ही मिल रहे 24 हजार

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रुपयों की किल्लत ने अब लोगों को बैंकों में गिड़गिड़ाने के लिए मजबूर कर दिया है। घरेलू जरूरतों के साथ ही दवा इलाज के लिए भी लोगों को रुपये निकालना मुश्किल कर दिया है। रुपये की कमी को देखते हुए बैंक कर्मियों ने भी भुगतान का नया फंडा अपना लिया है। रुपये के लिए ज्यादा जिद करने वालों को 24 हजार रुपये  और मान जाने वालों को दस हजार रुपये दिये जा रहे। इलाहाबाद बैंक में तीन हजार रुपये से ज्यादा निकासी नहीं हो रही।
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500 और 1000 रुपये की पुरानी नोट बंद हुए करीब एक माह होने को है। बंदी के फरमान के बाद लोगों को ताबड़तोड़ रुपये जमा करने शुरू किये। केंद्र सरकार द्वारा जमा रुपये की निकासी की लिमिट बांधने से लोगों ने निकासी कम की। शादी-विवाह, दवा-इलाज समेत घरेेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए लोगों को रुपये की जरूरत है। लेकिन बैंकों में नई करेंसी न आने से अब लोग काफी हद तक परेशान हैं। स्थिति यह है कि लोगों को बैंकों से अपना ही रुपया निकालने के लिए कर्मचारियों के सामने गिड़गिड़ाना पड़ रहा है। शनिवार को राबर्ट्सगंज के इलाहाबाद बैंक में ऐसा ही नजारा देखने को मिला। सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त हुए एक कर्मचारी बीमार चल रहे हैं। शनिवार को वे बैंक में अपने उपचार के लिए रुपये निकालने गए। यहां उन्होंने बात की तो पता चला कि सिर्फ तीन हजार रुपये ही निकल पाएंगे। इससे ज्यादा रुपये नहीं निकल सकेंगे। इस पर उन्होंने अपनी बीमारी की दुहाई दी लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। इससे वे काफी देर तक परेशान रहे। इसी तरह अन्य बैंकों में भी लोग रुपये निकालने जा रहे हैं लेकिन धन न होने से निराशा हाथ लग रही है। राबर्ट्सगंज एसबीआई शाखा के प्रबंधक दिनेश कुमार राय ने बताया कि अब तक नई करेंसी न आने से पैसा देने में दिक्कत हो रही है। जो लोग 24 हजार रुपये निकालने आ रहे हैं, उन्हें मनाया जा रहा है कि दस हजार रुपये निकाल लें। मानने वालों को दस हजार दिया जा रहा है और जो जिद पर अड़ जा रहे हैं उन्हें 24 हजार ही दिया जा रहा। प्रयास हो रहा है कि सभी को राजी पैसा दिया जाए ताकि आने वाले जरूरतमंदों के लिए धन बैंक में रहे।
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