जिला पंचायत दफ्तर से ढाई सौ पत्रावलियों एवं खनिज परिवहन से संबंधित कागजात गायब होने पर कोतवाली पुलिस ने अपर मुख्य अधिकारी (एएमए) आलोक सिंह की तहरीर पर तत्कालीन प्रभारी एएमए इंजीनियर रामाश्रय प्रसाद और लेखाकार राधेरमण के खिलाफ गबन का केस दर्ज किया है। आलोक सिंह का सोनभद्र से पिछले माह सीतापुर स्थानांतरण हुआ था, जबकि रामाश्रय को प्रभारी एएमए का चार्ज मिला था। 17 जून को आलोक सिंह फिर से सोनभद्र के एएमए बना दिए गए। वहीं, रामाश्रय प्रसाद ने इस मामले में खुद को बेकसूर बताया है।
पुलिस को दी गई तहरीर में एएमए आलोक सिंह ने बताया कि 18 जून को कार्यभार ग्रहण करने के बाद उन्होंने लिपिकों से पत्रवालियों की मांग की तो पता लगा लेखाकार और इंजीनियर पत्रावली अपने पास रखे हुए हैं। आलोक सिंह का आरोप है कि पत्रावलियों के बारे में पता करने के लिए लेखाकार और प्रभारी एएमए रहे अभियंता से संपर्क करने के बाद बात नहीं हो पा रही है। आलोक सिंह ने बताया कि उन्होंने कागजात गायब होने की सूचना पंचायती राज मंत्री और प्रमुख सचिव को भी दे दी है।
बताया कि गुरुवार को जिला पंचायत के बैरियर से संबंधित मुकदमा हाईकोर्ट में लगा था, फिर भी अभियंता और लेखाकार ने बैरियर से जुड़े कागजात उपलबध नहीं कराए। इसलिए मुकदमा दर्ज कराना पड़ा। उधर, इंजीनियर रामाश्रय कहते हैं कि उन्हें बेवजह इस मामले में फंसाया जा रहा है। पिछले साल आठ करोड़ का टेंडर स्वीकृत हुआ था, उसमें 34 लाख के स्टांप की चोरी की गई थी। चूंकि मामला हाईकोर्ट में चल रहा है, इसलिए खुद को बचाने के लिए फाइल गायब करके अब ठीकरा उनके सिर फोड़ा जा रहा है। फाइल बाबू के पास रहती है। उन्होंने सवाल उठाया कि निर्माण में न तो टेंडर हुआ और न ही इस्टीमेट बना तो फाइल कैसे गायब हो सकती है।