चोपन ब्लाक के बाड़ी के जंगल में जमीन पर कब्जे को लेकर हुई कार्रवाई के बाद दो पक्ष आमने-सामने हो गए हैं। एक पक्ष पांच दिनों से कलेक्ट्रेट पर धरना दे रहा तो दूसरे पक्ष ने आदिवासी नेता पर लोगोें को उकसाकर धरना दिलाने का आरोप लगाया है।
बाड़ी के जंगल में जमीन कब्जे को लेकर दो पक्षों में हुई मारपीट के बाद दोनों पक्षों के लोगों की गिरफ्तारी का मामला दिन पर दिन नया मोड़ ले रहा है। एक पक्ष कैमूर क्षेत्र मजदूर किसान महिला संघर्ष समिति के बैनरतले कलेक्ट्रेट पर धरना दे रहा है।
इनकी मांग है कि इस मामले में गिरफ्तार हुई शोभा के साथ 18 महिलाओं को बिना शर्त रिहा किया जाए। इसके साथ कई अन्य मांगों को लेकर भी संगठन से जुडे़ लोगों का धरना सोमवार को भी जारी रहा।
कलेक्ट्रेट में चल रहे धरने के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन और पुलिस लगातार कड़ी नजर रखे हुए है। एएसपी शंभूशरण यादव और रामयज्ञ यादव कलेक्ट्रेट में मौजूद रहकर स्थिति की निगरानी कर रहे हैं।
उधर, मामले से जुडे़ दूसरे पक्ष के लोगों ने भी सोमवार को इस धरने के विरोध में मोर्चा खोल दिया। दूसरे पक्ष से भी बाड़ी गांव की जशोदा देवी और 15 अन्य महिलाओं को गिरफ्तार करने और विरोधियों के धरना देने के विरोध में
सदर तहसील पर जशोदा देवी के पति महावीर गोड़ की अध्यक्षता में बैठक हुई। इसमें महाबीर गोड़ और संजय दूबे ने कहा कि कलेक्ट्रेट पर धरना दे रहे लोगों का नेतृत्व कर रही महिला बाहरी लोगों को लेकर जंगल की जमीनों पर
कब्जा करा रही है। महावीर और संजय ने महिला की संपत्ति की जांच की मांग भी उठाई। बैठक में रामविलास बैगा, संजय गोड़, अमरनाथ बैगा, मुंशी बैगा, सूरज लाल गोड़, ईश्वर प्रसाद, देव किशुन शामिल रहे।
उधर, डीएम डीके सिंह का कहना है कि बाड़ी मामले में दोनों पक्षों के खिलाफ कार्रवाई हुई है। उन्होंने कलेक्ट्रेट में चल रहे धरने को अनुचित बताया और कहा कि जब वे वार्ता को तैयार हैं तो फिर धरना क्यों। जब दोनों पक्षों पर कार्रवाई हुई तो किसी एक पक्ष का मामला वापस लेने की मांग नाजायज है।