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Sonebhadra News: कहीं 11 माह तो कहीं डेढ़ साल बाद भी ईओ की तैनाती नहीं

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सोनभद्र। नीति आयोग के आकांक्षी जनपद सोनभद्र में विकास कार्यों को रफ्तार देने के लिए सभी महत्वपूर्ण पदों को भरने का निर्देश है। नगरीय क्षेत्रों में लंबे समय से अधिशासी अधिकारी (ईओ) के पद ही खाली हैं। किसी निकाय में 11 माह से तो कहीं डेढ़ माह से अस्थायी ईओ के सहारे निकाय का कामकाज चल रहा है। जिले की दस में से पांच निकायों में ईओ तैनात नहीं है। इसमें आकांक्षी निकाय रेणुकूट नगर पंचायत भी शामिल है।
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जिले की सबसे पुरानी निकाय घोरावल नगर पंचायत में स्थायी ईओ का पद करीब डेढ़ साल से खाली है। नगर पालिका परिषद सोनभद्र के ईओ विजय कुमार यादव के पास घोरावल का अतिरिक्त प्रभार है। रॉबर्ट्सगंज से करीब 30 किमी दूर घोरावल नगर पंचायत में स्थायी ईओ नहीं होने से कामकाज में दिक्कत आ रही है।
जिले की दूसरी सबसे बड़ी नगर पंचायत ओबरा में ईओ के पद पर मधुसूदन जायसवाल की तैनाती है। इसके अलावा इनके पास दो अन्य आकांक्षी निकाय रेणुकूट और चोपन नगर पंचायत के ईओ का प्रभार भी है। ओबरा से चोपन की दूरी करीब 12 किमी है और रेणुकूट की दूरी करीब 45 किमी हैं। ऐसे में एक ईओ के पास तीन निकायों का प्रभार होने से प्रभार वाले निकायों में कामकाज कराने में काफी दिक्कत हो रही है।
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इसी तरह चुर्क/गुरमा नगर पंचायत के ईओ अमित कुमार सरोज को नवसृजित नगर पंचायत डालाबाजार का प्रभार सौंपा गया है। यहां ईओ रहीं देवहुति पांडेय के स्थानांतरण के बाद से स्थायी ईओ की तैनाती नहीं हो सकी है। पिपरी के ईओ भोलानाथ कुशवाहा के पास दुद्धी नगर पंचायत का अतिरिक्त प्रभार है। दुद्धी के ईओ रहे रामसमुख का पिछले साल 26 फरवरी को स्थानांतरण हो गया। तब से यहां स्थायी ईओ की तैनाती नहीं हुई है। इस तरह 11 माह से यहां स्थायी ईओ नहीं है। इस प्रकार से पिपरी के ईओ को करीब 40 किमी दूर दुद्धी नगर पंचायत की भी जिम्मेदारी संभालनी पड़ती है।
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इन निकायों में नहीं हैं स्थायी ईओ
आकांक्षी निकाय के रूप में चयनित नगर पंचायत रेणुकूट के साथ ही नगर पंचायत चोपन, डाला बाजार, दुद्धी और घोरावल नगर पंचायत में स्थायी ईओ का पद खाली है। इस संबंध में नोडल अधिकारी/ईओ विजय कुमार यादव का कहना है कि जनपद के पांच निकायों में स्थायी ईओ नहीं है। शासन स्तर से इनकी तैनाती होनी है। फिलहाल प्रभारी ईओ के जरिये ही कामकाज चल रहा है।
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