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Sonebhadra News: हार्ट अटैक आए तो उपचार के लिए जाना होगा सौ किमी दूर

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बेहतर स्वास्थ्य संसाधनाें और सेवाओं के दावों के बीच जिले में जमीनी हकीकत इससे जुदा है। ऊर्जा नगरी में एक भी हृदय रोग के चिकित्सक नहीं हैं। ऐसे में समय से बीमारी की पहचान न होने से हार्ट अटैक से मरने वालों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।
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असंतुलित खान-पान व अनियमित दिनचर्या के कारण हृदयरोग के मामले जिले में तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे में जिले के लोगों को जरा-सी असावधानी मुश्किल में डाल रही है। जिले के सरकारी अस्पतालों में कार्डियोलाजिस्ट नहीं हैं। ऐसे में मरीजों को आर्ट अटैक की जानकारी समय से नहीं हो पाती है।
हृदय रोगियों के उपचार की बात करें तो फिजिशियन ही प्राथमिक उपचार कर रहे हैं। विशेषज्ञ न होने से ज्यादातर मरीजों में हार्ट अटैक की पहचान नहींं हो पाती है। अगर गंभीर रोगी आ जाए और पहचान हो भी जाए तो उसको प्राथमिक उपचार देकर वाराणसी रेफर कर दिया जाता है। अधिकांश मरीज जिला अस्पताल से वाराणसी की 100 किमी की दूरी तय कर पाने से पहले ही दम तोड़ देते हैं।
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न ‘धड़का’ दिल, न लगा मरहम

जिला संयुक्त चिकित्सालय परिसर में करीब आठ साल पूर्व हार्ट केयर यूनिट बनी थी। आज तक यहां न कोई मशीन पहुंची और न कोई डॉक्टर। ऐसे में वर्तमान में यूनिट भवन का उपयोग अन्य कार्यों में किया जा रहा है। इसके बाद प्रदेश में तीन दलों की सरकारें शासन कर चुकी हैं, मगर किसी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। ऐसे में हृदय संबंधी बीमारी से पीड़ित वाराणसी के अस्पतालों पर निर्भर रहते हैं। दम तोड़ते मरीजों की पुकार कोई नहीं सुनता। समस्या पर न तो जिम्मेदारों का ‘धड़का’ दिल, न मरहम लगा।

ऐसे पहचानें हृदयाघात
डॉ. एसएस पांडेय के मुताबिक हृदयाघात के लक्षण सीने में दर्द या अचानक पसीना आना है। कंधे में दर्द भी हृदय रोग का लक्षण होता है। शुगर मरीजों में अधिकांश के हृदयाघात में दर्द नहीं होता। केवल उन्हें अचानक पसीना आने लगता है। घबराहट व बेचैनी के अलावा कभी-कभार उल्टी होने लगती है।
यदि यह स्थिति पैदा हो तो तत्काल चिकित्सक के संपर्क में आ जाएं। जितनी जल्दी हो सके मरीज को चिकित्सालय में पहुंचा दें, जहां उनका इलाज शुरू हो सके। हृदयाघात वाले मरीजों के लिए हर मिनट महत्वपूर्ण होता है। जिले में हार्ट के मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद रेफर किया जाता है।

गत सात नवंबर को सदर कोतवाली क्षेत्र के अमाेखर गांव निवासी रंजना (32) खाना खाकर सो गईं। रात दो बजे के करीब सांस लेने में दिक्कत और घबराहट होने लगी और वो अचेत होकर गिर पड़ीं। परिजन जिला अस्पताल आए तो मृत घोषित कर दिया गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हार्ट अटैक से मौत की पुष्टि हुई। परिजनों ने बताया कि कुछ माह पूर्व इसी तरह की समस्या हुई थी तो पीएचसी केकराही ले गए, जहां बीपी की समस्या बताई गई थी।

15 नवंबर को सीएचसी घोरावल में तैनात स्वास्थ्य कर्मी बैजनाथ (32) को सुबह अचानक से घबराहट हुई और वे अचेत होकर गिर पड़े। स्थानीय लोग उन्हें लेकर जिला अस्पताल पहुंचे, जहां हार्ट अटैक बताते हुए वाराणसी रेफर कर दिया गया। मधुपुर के पास रास्ते में ही मौत हो गई।

कुछ दिन पूर्व दुद्धी कोतवाली क्षेत्र के सरडीहा गांव में हिंडाल्को कर्मी बाबू लाल 24 पुत्र देवकिशुन की हार्ट अटैक से मौत हो गई। भोर में करीब 4 बजे वह सो कर उठा उसके बाद अपनी पत्नी से खाना बनाने के लिए बोलकर दोबारा सो गया। पत्नी जब उठाने गई तो उसने बताया कि उसके सीने में दर्द हो रहा है। परिजन उसे सीएचसी दुद्धी ले गए, जहां उपचार के दौरान उसकी मृत्यु हो गई।
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