पहले के जमाने में होने वाली विचारों की लड़ाइयां अब अत्याधुनिक हथियारों से होने लगी हैं, जो देश, दुनिया और समाज के लिए खतरनाक है। ईरान, अफगानिस्तान और सीरिया इसी लड़ाई में बर्बाद हो चुके हैं।
दिनों दिन हालात खराब होते जा रहे हैं। इनमें मारे जा रहे हैं बेगुनाह लोग और अबोध बच्चे, जो दुखद है। उन्होंने कहा कि दुनिया से आतंकवाद का खात्मा करना है तो शोषण को कम करना होगा। विंध्य कन्या कालेज में रविवार को पधारीं सुप्रसिद्ध उपन्यासकार नासिरा शर्मा ने ‘अमर उजाला’ से बातचीत में ये बातें कहीं।
ईरान मामलों की विशेषज्ञ नासिरा शर्मा ने कहा कि 50 के दशक और आज के ईरान में काफी अंतर है। उस दौर में खुलापन था, साक्षात्कार की आजादी थी। अब सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बन गई है। यदि आतंकवाद से निजात पाना है तो आवश्यक है कि अमेरिका अपना वर्चस्व, फौजें और शोषण कम करे।
उन्होंने कहा कि पहले हथियार इंकलाब के लिए दिए गए थे। अब जब उनका पलटवार देने वालों पर होने लगा तो हथियार देने वालों को परेशानी होने लगी है। इस जंग में नुकसान आम आदमी का हो रहा है।
नासिरा शर्मा ने कहा कि आज अफगानिस्तान की सांस्कृतिक विरासत, धरोहर सब नष्ट हो चुकी है। इसके चलते नई पीढ़ी बदले की भावना लेकर उतर रही है, ऐसे में अफगानिस्तान में बदलाव बहुत मुश्किल है।
आज के पुरस्कार वापसी के चलन पर उन्होंने कहा कि लेखक, साहित्यकार, कलाकार अपनी रचनात्मकता के माध्यम से विरोध करते-करते थक गया है, लेकिन बदलाव नहीं आया। ऐसे में वह अपने सम्मान को वापस कर रहा है। इस पर ज्यादा कुछ कहना उचित नहीं होगा।