राबर्ट्सगंज कचहरी परिसर स्थित सोनभद्र बार एसोसिएशन सभागार में बुधवार की रात्रि में कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ वरिष्ठ साहित्यकार अजय शेखर और कवि कमलेश राजहंस ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। मिर्जापुर की कवयित्री विभा सिंह ने मां सरस्वती की वंदना सुनाई।
आगरा से आए भूषण रागी ने सुनाया... अल्हड़ और मस्त होता प्यार होली का, उमंग और तरंग का होता त्यौहार होली का। आपके हाथों लगे गुलाल मेरे गालों पर, वर्ष भर मैने किया इंतजार होली का। सुनाया, जिसे खूब सराहा गया।
भोपाल के दीपक दनादन ने, हमने समझा परोपकारी, पर उपकार करे निज हेतू, जिनसे अपना मंगल चाहा, वहीं बन गए राहु-केतु। मुगलसराय के सुहैल उस्मानी ने सुनाया... आप जरा याद आने लगे, हम गजल गुनगुनाने लगे।
हर तरफ एकता देखकर, हम भी होली मनाने लगे। पटना के शंकर कैमूरी ने सुनाया... देखकर है खफा आईना, जाने क्या कह गया आईना। दोनों हैं आमने-सामने, मैं तेरा तूं मेरा आईना।
दक्षिणी भारत से पधारे मनोज मद्रासी ने धन दौलत तो साथ में घड़ी दो घड़ी होती है, जिस घर में मां बाप होते हैं वो जगह जन्नत से भी बड़ी होती है।
सुनाकर खूब तालियां बटोरीं। प्रतापगढ़ के डा. रणजीत सिंह, रायपुर छत्तीसगढ़ के रमेश विश्वहार, शिवदास, वाराणसी के रामनरेश पाल, कमलेश राजहंस, अजय शेखर ने भी कविता सुनाई।
अध्यक्षता अजय शेखर और संचालन कमलेश राजहंस ने किया। कवियों को स्मृति चिंह देकर सम्मानित किया गया। सोनभद्र बार एसोसिएशन अध्यक्ष ओम प्रकाश पाठक और अशोक तिवारी ने कवि सम्मेलन के समापन की घोषणा की।
इस मौके पर सेवानिवृत्त जिला जज उदित नारायण सिंह, रामकृष्ण तिवारी, राजबली चौबे, अरुण पांडेय, महेंद्र शुक्ल, प्रभाकर श्रीवास्तव, रमेश राम पाठक, विनोद चौबे, दिलीप सिंह, प्रदीप पांडेय मौजूद रहे।