अनपरा/रेणुसागर। व्यावसायिक सिलिंडर की आपूर्ति की कमी से होटल-ढाबा, रेस्टोरेंट संचालकों ने मेन्यू कार्ड बदल दिया है। तवा रोटी, कबाब, कड़ाही पनीर, फ्राई, नॉनवेज जैसे अन्य व्यंजन को कई जगह मेन्यू से हटा दिया गया है।
उधर, परियोजनाओं की कैंटीन में भी नाश्ता-भोजन की व्यवस्था चरमरा गई है। एक परियोजना में कैंटीन में लड्डू, समोसा की आपूर्ति अगले आदेश तक स्थगित कर दी है। कर्मचारियों को भी यह हिदायत दी गई है कि स्टाफ मेस व गेस्ट हाउस में नियमित भोजन मेन्यू का पालन करना संभव नहीं होगा।
जिले में पिछले 10 दिन गैस की आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित है। नगरीय क्षेत्रों में 25 और ग्रामीण क्षेत्रों में 45 दिन की समय सीमा के बाद बुकिंग होने पर ही सिलिंडर मिलने का नियम लागू किया गया है। सर्वर जाम होने से बुकिंग न होने के कारण उपभोक्ताओं को गैस सिलिंडर नहीं मिल पा रहा।
घरों में तो लोग इंडक्शन चूल्हा, हीटर, लकड़ी, उपला आदि की व्यवस्था कर जैसे-तैसे भोजन बना ले रहे हैं, लेकिन कॉमर्शियल सिलिंडर न मिलने के कारण उनकी रसोई के चूल्हे की आंच धीमी पड़ गई है। कुछ जगहों पर डीजल व कोयले की भट्ठी का इस्तेमाल शुरू हुआ है तो कुछ ने किल्लत के बीच ज्यादा दिनों तक भोजन की व्यवस्था बनाए रखने के लिए भोजन के मेन्यू में कटौती कर दी है।
रेणुकूट, अनपरा, शक्तिनगर में स्थित औद्योगिक परियाेजनाओं की कैंटीन पर भी इसका असर साफ दिख रहा है। एक परियोजना की ओर से कर्मचारियों के लिए सूचना प्रसारित कर कहा गया है कि उन्हें कैंटीन में लड्डू, समोसा अग्रिम आदेश तक नहीं मिल सकेगा।
नियमित भोजन मेन्यू का भी पालन भी संभव नहीं होगा। ऊर्जांचल की एक अन्य परियोजना में कैंटीन और गेस्ट हाउस संचालकों को गैस की जगह पर इलेक्टि्रक और इडंक्शन चूल्हा खरीदने के लिए कहा गया है। साथ ही कोयला जलाने के लिए भट्ठी बनाने के लिए भी कहा है।
अनपरा नगर के ककरी, रेणुसागर, झूलन ट्रॉली, अनपरा बजार, औड़ी चौराहा क्षेत्र के अलावा हाईवे पर मौजूद होटल, रेस्टूरेंट, ढाबा संचालकों होटल में ज्यादा ईंधन खपत वाले व्यंजन बनाने से कन्नी काट रहे हैं।