बीच-बीच में पानी चढ़ाने, इंजेक्शन लगाने का क्रम जारी रहा। शुक्रवार की सुबह जब हालत बिगड़ने लगी तब नौ बजे के करीब उसे ऑपरेशन कक्ष में ले जाया गया। ऑपरेशन के दौरान ही जहां बच्चे की मौत हो गई। वहीं जच्चा को ऑपरेशन के बाद खून चढ़ाया जाने लगा। कुछ ही देर में उसकी भी हालत काफी खराब हो गई तब एंबुलेंस बुलाकर वाराणसी भेज दिया गया। वहां पहुंचने पर प्रसूता को मृत घोषित कर दिया गया।
उधर, इसकी जानकारी मिलने सीएमओ डॉ. रमेश कुमार मिश्र ने एसीएमओ/नोडल को जांच के लिए मौके पर भेजा। जांच में पता चला कि बगैर पंजीयन के ही अस्पताल संचालित किया जा रहा था। सीएमओ ने बताया कि अस्पताल सील करा दिया गया है। संचालक के खिलाफ एफआईआर के निर्देश दिए गए हैं।
डेढ़ माह में बिना पंजीयन अस्पताल में प्रसूता के मौत की दूसरी घटना
मुख्यालय की तरह ही कोन में गत 30 मई को अवैध अस्पताल में प्रसव के लिए लाई गई आशा कार्यकर्ता की मौत हो गई थी। ऑपरेशन के समय बच्चा तो बच गया लेकिन इस मामले में जच्चा-बच्चा दोनों की माैत हो गई।