आयुर्वेद चिकित्सा और प्राकृतिक इलाज के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए आयुष अस्पतालों के परिसर में हर्बल गार्डेन बनाए जाएंगे। इनमें विभिन्न प्रकार के औषधि पौधे लगाए जाएंगे। अस्पताल में उपचार के लिए आने वाले मरीजों को उसके फायदे बताते हुए अपनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
लोढ़ी में 50 बेड का आयुष अस्पताल संचालित है। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में भी आयुर्वेदिक अस्पताल और आयुष सेंटर स्थापित हैं। इन अस्पतालों में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। आयुर्वेद चिकित्सा के तमाम लाभ के बावजूद लोग उससे अनभिज्ञ हैं।
इसके प्रति जागरूकता लाने के लिए डीएम ने सभी आयुष अस्पतालों में हर्बल गार्डेन बनाने के निर्देश दिए हैं। इसमें अश्वगंधा, एलोवेरा, गिलोय, नीम, तुलसी, अमलाकी, ब्रह्मी, गुड़ची, हरेड़ा, कुमारी, मंडुका परणी, सतावरी, सुंठी समेत कई जड़ी बूटियों के पौधे लगाए जाएंगे।
अस्पताल आने वाले मरीजों को इन पौधों की खूबियों के बारे में जानकारी दी जाएगी। साथ ही अपने आसपास भी ऐसे गार्डेन विकसित कर उसका लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में डीएम बद्रीनाथ सिंह ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को इसके लिए निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही आयुष, होम्योपैथिक, आयुर्वेदिक चिकित्सा विधि से होने वाले उपचार और उसके फायदे बताने के लिए भी संपूर्ण समाधान दिवस के अवसर पर कैंप लगाने का निर्देश दिया है।
परिषदीय स्कूलों में बनाए गए हैं हर्बल गार्डेन
बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से भी पूर्व में परिषदीय विद्यालयों में हर्बल और किचेन गार्डेन बनाने के निर्देश दिए गए थे। इसके लिए धनराशि भी उपलब्ध कराई गई थी। जिले के कई विद्यालयों में यह गार्डेन बनाए भी गए हैं। इसके माध्यम से बच्चों को औषधीय पौधों के बारे में जानकारी दी जा रही है।