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पटाखों के तेज धमाकों से बचें दिल के मरीज

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दीपोत्सव पर आज दीपों की लड़ी सजेगी और आतिशबाजी भी होगी। आनंद और उमंग के इस माहौल में भी विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। खास तौर से उन लोगों के लिए जिन्हें पहले से ही स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हैं। पटाखों का शोर और तेज धुआं हृदय रोग, अस्थमा, श्वसन रोगी और न्यूरोलॉजिकल समस्याओं से जूझते लोगों के लिए काफी हानिकारक है। ऐसे लोगों को विशेष सावधानी और सतर्कता बरतते रहने की जरूरत है।
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वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. एसएस पांडेय कहते हैं कि पटाखों के धमाके का शोर इन रोगों के शिकार लोगों की दिक्कतों को बढ़ा देता है। पटाखों की अचानक तेज आवाज ऐसे रोगियों के लिए हानिकारक हो सकती है। पटाखों के धमाके दिल के दौरे का भी कारण बन सकते हैं। शोरगुल वाले वातावरण में दिल का दौरा पड़ने की आशंका 70 फीसदी तक बढ़ जाती है। इससे तंत्रिकाओं से संबंधित विकारों का जोखिम भी कई गुना बढ़ जाता है।
ऐसे में सभी को बचाव करते रहना जरूरी है। पहले से ही हृदय रोगों के शिकार लोगों को और भी सतर्कता बरतने की जरूरत है। प्रदूषण के कारण सांस की समस्याओं के जोखिम के बारे में अक्सर बात की जाती है पर इससे हृदय रोगियों को होने वाली दिक्कतों पर ध्यान नहीं दिया जाता है। जिन लोगों को दिल की बीमारी है या हाई ब्लड प्रेशर की दवा ले रहे हैं, ऐसे लोगों के लिए अधिक शोर में जाना मुश्किलों का सबब हो सकता है।
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पटाखों की अचानक होने वाली तेज आवाज रक्तचाप और हृदय गति को बढ़ा सकती है। जिन्हें पहले से हृदय-न्यूरोलॉजिकल समस्याएं हैं। वे कोशिश करें कि शाम के समय घर के भीतर ही रहें। बंद कमरे में रहने से शोर और प्रदूषण दोनों से बचाव किया जा सकता है। सांस लेने में तकलीफ या सीने में दर्द जैसे लक्षण दिखाई देते हैं, तो तुरंत अपने डॉक्टर से सलाह लें। कम ध्वनि वाले पटाखों को ही प्राथमिकता दें।
आंखों का भी रखें ध्यान
नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रदीप सिंह ने कहा कि दिवाली है तो पटाखे भी खूब चलेंगे। आंख में बारूद या जलता हुआ कण जाए तो रगड़ें नहीं। उसे ठंडे पानी से धोना ही बेहतर है। रगड़ने से आंख के पर्दे को नुकसान पहुंचता है। कटोरी में ठंडा पानी लेकर उसमें आंख डालें और एंटीबायोटिक ड्रॉप डालें। वहीं आराम न मिलने और घाव बनने पर विशेषज्ञ चिकित्सक को दिखाएं। चश्मा लगाकर पटाखे जलाएं। कान की परेशानी वाले तेज आवाज वाले पटाखों से बचें। अगर पटाखों से हाथ-पैर या फिर शरीर का कोई हिस्सा जल जाता हैं तो उसे रगड़ें नहीं। ठंडे पानी से धोएं। जख्म अधिक होने पर चिकित्सक को दिखाएं।
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