बिजली विभाग के इंजीनियरों ने मांगा सामूहिक स्थानांतरण
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नक्सल इलाकों के दर्जनभर गांवों की बिजली गुल हो गई है। इन गांवों में दस से 15 दिन से ट्रांसफार्मर जल गए हैं। कई गांवों में एक से दो माह से ट्रांसफार्मर खराब है। उनकी अब तक मरम्मत नहीं हो सकी है। इससे लोगों में असंतोष है। कोन, ग्रामीणों की शिकायत के बावजूद बिजली विभाग इस पर ध्यान नहीं दे रहा। जबकि डीएम ने ट्रांसफार्मर जलने के 72 घंटे बाद ही उसकी मरम्मत करने या बदलने का निर्देश दिया है।
बता दें कि बारिश के दिनों में ट्रांसफार्मरों के फूंकने से लोगों को सबसे अधिक जहरीले जंतुओं का खतरा बना हुआ है। नक्सल क्षेत्रों में तैनात फोर्स को भी ड्यूटी करने में दिक्कतें हो रही है। बावजूद इसके बिजली विभाग विद्युत आपूर्ति बहाल कराने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहा है। कोन घघिया गांव मेें करीब एक माह से 25 केवीए का लगा ट्रांसफार्मर फूंका पड़ा है। इसी तरह से दस से 15 दिनों से बरवाडीह, चेरवाडीह, सलैयाडीह, खेमपुर, बरवाखेड़ा, बहुअरा, खरौधी, कुड़वा, घघिया समेत 15 गांवों का ट्रांसफार्मर फूंका पड़ा है। ग्रामीणों के सूचना देने के बाद भी बिजली विभाग ट्रांसफार्मरों को बदलवा नहीं रहा है।
इसको लेकर उपभोक्ताओं में नाराजगी है और उनका गुस्सा कभी भी विकराल रूप धारण कर सकता है। खलियारी चकया गांव में वर्ष 2015 से 25 केवीए का ट्रांसफार्मर फूंका पड़ा है। इसी तरह से कई माह से बलियारी, दरमा, पडऱी, रायपुर के अलावा चतरा और नगवां ब्लॉक के 12 से अधिक गांवों के ट्रांसफार्मरों के खराब होने से आपूर्ति बाधित है। मधुपुर तीन दिन पूर्व कस्बे में लगा ढाई सौ केवीए का ट्रांसफार्मर फूंक गया था जो समाचार लिखे जाने तक बदला नहीं गया।
उधर मझुई गांव का भी 25 केवीए का ट्रांसफार्मर खराब है। बिजली विभाग के अधीक्षण अभियंता एससी यादव का कहना है कि संबंधित एसडीओ और जेई से ट्रांसफार्मरों के बदलने में विलंब के कारणों के बारे में रिपोर्ट तलब किया जाएगा। जिन गांवों का ट्रांसफार्मर खराब होगा उन्हें बदल कर आपूर्ति बहाल कराई जाएगी।