शक्तेसगढ़ आश्रम के स्वामी अड़गड़ानंद जी महाराज ने कहा कि मृत्यु बोध से वैराग्य का रास्ता शुरू होता है। उन्होंने कहा कि भगवान बुद्ध ने अर्थी देखी और उनकी सांसारिक व्यसनाएं जल गईं और वह वैराग्य के रास्ते पर निकल पड़े।
एनटीपीसी सिंगरौली के आवासीय परिसर स्थित शक्तेश्वर मंदिर परिसर में बृहस्पतिवार आयोजित सत्संग और प्रवचन कार्यक्रम में अड़गड़ानंद जी ने भगवान बुद्ध के जीवन पर विस्तार से प्रकाश डाला और कहा कि सच्चा सुख मानव के अंतहकरण में है, बाहर नहीं। गीता में सभी प्रकार की समस्याओं का समाधान बताते हुए उन्होंने कहा कि प्यार, समर्पण और भगवान भजन से सच्चे आनंद की प्राप्ति होती है।
उन्होंने रामायण के कई प्रसंगों पर व्याख्यान दी और लक्ष्मण का राम के प्रति समर्पण का उल्लेख किया। उन्होंने सभी भक्तों व श्रोताओं से जाति वर्ण भूल कर उन्नति मार्ग अपनाने को कहा। करीब घंटे भर के प्रवचन के दौरान उन्होंने कई मार्मिक प्रसंगों का उल्लेख किया।
मंदिर परिसर में निर्धारित कार्यक्रम से करीब तीन घंटे विलंब से अड़गड़ानंद महाराज के पहुंचने के बाद भी आस्थावानों की संख्या कम नहीं हुई और काफी संख्या में महिला, पुरुष, बच्चे कार्यक्रम का हिस्सा बने। कार्यक्रम के बाद अखंड भंडारे का आयोजन किया गया जो देर रात तक चला। इस मौके पर बड़ी संख्या में बाबा के अनुयायी मौजूद रहे।