आरा से की जा रही थी पूरी डील, इस तरह कराई जा रही थी तस्करी
एएसपी के मुताबिक आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि आरा का रहने वाला व्यक्ति इसके लिए धन व वाहन की व्यवस्था करता है। उसके बताए स्थान पर उन्हें गांजा पहुंचाना होता है। बताई गई जगह पर खेप पहुंचाने के बाद कार चालक राजकुमार को 30 हजार, उसके बगल में बैठे विकास 25 हजार, पीछे बैठकर गांजा ले जाने वाले विनोद को 15 हजार दिए जाते हैं। किसी को इसका पता न चलने पाए इसके लिए यह धनराशि उन्हें आरा पहुंचने पर नकद के रूप में उपलब्ध कराई जाती है।
वहीं रास्ते में होने वाले खर्चों के लिए धनराशि क्यूआर कोड के माध्यम से उपलब्ध कराया जाता है। रास्ते में कोई दिक्कत न आने पाए इसके लिए गांजा वाले वाहन से आगे एक और कार चलती है जिसमें बैठे व्यक्ति का काम रास्ते में होने वाली चेकिंग का लोकेशन और रास्ते की जानकारी देना होता है। ओडिशा में जिन व्यक्तियों से गांजे की खरीद की जाती है। उन्हें पहले ही ऑनलाइन धनराशि भेज दी जाती है।
पूछताछ में ओडिशा-बिहार के कई नाम प्रकाश में आए हैं। सभी के भूमिका की जांच की जा रही है। बरामद मोबाइल फोन एवं अन्य तकनीकी साक्ष्यों के जरिए मिली जानकारी के आधार पर भी नेटवर्क और उससे जुड़़े व्यक्तियों के बारे में पता लगाया जा रहा है। पकड़े गए व्यक्तियों के आपराधिक इतिहास के बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है। - ऋषभ रुणवाल, एएसपी ऑपरेशन।