सरकारी आवास दिलाने के नाम पर आदिवासी महिला के साथ सामूहिक दुष्कर्म के आरोपों पर विशेष न्यायाधीश एससी-एसटी कोर्ट आबिद शमीम की अदालत ने केस दर्ज करने का आदेश दिया है। पीड़िता की ओर से प्रस्तुत प्रार्थना पत्र को कोर्ट ने प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध मानते हुए बीजपुर पुलिस को तत्काल केस दर्ज कर कार्रवाई के लिए कहा है।
बभनी थाना क्षेत्र स्थित एक गांव निवासी आदिवासी महिला ने अधिवक्ता रोशन लाल यादव के जरिए दाखिल धारा 156 (3) सीआरपीसी के प्रार्थना पत्र दाखिल किया था। बताया था कि दो माह पूर्व सुधीर पांडेय निवासी नधिरा और चिंतामणि विश्वकर्मा निवासी अम्मा टोला (बकरिहवा), थाना बीजपुर उसके घर पर आए और सरकारी आवास दिलाने के लिए फार्म भरवाया। कहा था कि जब अधिकारी आएंगे तो तुम्हें अधिकारियों के पास ले चलेंगे और आवास पास करवा देंगे। गत दो जनवरी की शाम दोनों उसके घर आए और सभी कागज लेकर साथ चलने को कहा। कार में बैठाकर बकरिहवा ले गया और वहां डरा-धमका कर दुष्कर्म किया। किसी तरह भागकर अपने घर आई। पुलिस में सुनवाई न होने पर कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया। मामले में सुनवाई करते हुए अदालत ने बीजपुर थानाध्यक्ष को एफआईआर दर्ज कर विधि अनुरूप विवेचना का आदेश दिया है।