सोनभद्र। जिले में साइबर अपराध के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। ऑनलाइन माध्यम से ठग नए-नए तरीके अपना कर लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। कभी एटीएम कार्ड बंद होने तो कभी खाता ब्लाक होने का हवाला देकर ठगी करने वाले अब फेसबुक, व्हाट्सएप कॉल के माध्यम से लोगों से पैसे ऐंठ रहे हैं। पिछले चार माह में ही पुलिस के पास साइबर ठगी के 71 मामले दर्ज हुए हैं। कई मामले ऐसे भी हैं, जिनमें लोग अपनी सामाजिक छवि के फेर में शिकायत से हिचकते हैं।
पुलिस के तमाम परिश्रम के बावजूद पिछले सालों की तुलना में साइबर अपराध में वृद्धि हुई है। पुलिस रिकार्ड में दर्ज शिकायतों और लोगों की आपबीती पर गौर करें तो ठगी के कई तरीके तो बेहद हैरान करने वाले होते हैं। जिले में साइबर अपराधियों पर नकेल कसने और पीड़ितों की मदद के लिए पुलिस लाइन में साइबर सेल का गठन है। साइबर ठगी संबंधी मामलों में यहां सीधे शिकायत की जा सकती है। एक रिपोर्ट की माने तो जिले भर से साइबर सेल में जनवरी से अब तक ठगी की 71 शिकायतें मिली। इनमें से गंभीर मामलों में कुल 24 लोगों ने केस भी दर्ज कराए। हालांकि पुलिस टीमों ने मेहनत कर इस बीच 774822 रुपये वापस कराए।
केस एक: कांशीराम कॉलोनी निवासी ऋषभ केशरी के मोबाइल पर मार्च में एक नौकरी के लिए लिंक आया। जालसाजों ने झांसा देकर उनसे सात बार में 2.45 लाख विभिन्न खातों में जमा करा लिया।
केस दो: कोतवाली क्षेत्र के एक गांव निवासी युवक को बीस दिन पूर्व वीडियो काल आया। अश्लील वीडियो बनाकर उसे वायरल करने की धमकी देकर पंद्रह हजार रुपये की मांग की। एक अन्य ठग ने फर्जी सीबीआई अफसर बनकर कॉल किया। हालांकि समय रहते युवक ने मामले को भांप लिया और पुलिस को सूचना दी।
केस तीन: सदर कोतवाली निवासी सोहन सिंह ने फरवरी में अपने मोबाइल से किसी को छह हजार रुपये भेजा। पैसा खाते से कट गया, मगर गया नहीं। बैंक में जानकारी देने पर बताया गया कि गूगल से कस्टमर केयर का नंबर निकाल बात करें। जब पीड़ित ने जब गूगल से नंबर निकालकर कॉल किया तो जैसे बोले वैसा करने को कहा गया। उस तरीके का पालन करने पर दो बार में एक लाख 82 हजार रुपये की ठगी हो गई।
इस तरह का ट्रेंड लोन एप, मोबाइल पर कॉलिंग, सोशल मीडिया अकाउंट हैक, व्हाट्सअप पर फेक फोटो, फैमिली आइडी में इनकम अपडेट करना, केवाईसी अपडेट करना, पे-टीएम-केवाईसी अपडेट करना, अश्लील वीडियो और फोटो, सिम स्वैप, नेशनल पेंशन स्कीम में डाटा अपडेट करना, गांवों में एजेंट बनकर आवास के नाम पर अंगूठा और आंखों को स्कैन करना, टावर लगवाने के लिए रजिस्टेशन के नाम पर पैसे की मांग सहित अन्य माध्यमों से भी लोगों को ठगी का शिकार बनाया जा रहा है। जुगैल क्षेत्र में पूर्व में आवास के नाम पर भी ठगी के मामले सामने आ चुके हैं।
साइबर अपराध से ऐसे बचें
- लाटरी या नौकरी के लुभावने लिंक या कॉल के लालच में न आएं
- किसी अनजान सामान की बिना जांच ऑनलाइन पेंमेट से बचें।
- बोनस, रिचार्ज, कैश बैक के लुभावने आफर के लालच में आकर अपने बैंक डिटेल साझा न करें।
- जीमेल और ईमेल आइडी का पासवर्ड कहीं पर न लिखें, इसे याद रखें।
- समय-समय पर अपनी आईडी का पासवर्ड बदलते रहें। - अपना यूपीआई पिन किसी अनजान लिंक पर न डालें।
- कार्ड स्वैप मशीन का इस्तेमाल सावधानी से करें।
- फोन पर आए ओटीपी को किसी से साझा न करें।
- मोबाइल या कंप्यूटर बेचने से पहले गूगल अकाउंट में जाकर अपनी आइडी रिमूव कर दें।
- अंजान मैसेज लिंक या मोबाइल पर आए नोटिफिकेशन पर बिना जानकारी के क्लिक न करें।
- अपने व्हॉट्सएप पर टू स्टेप लॉक जरूर लगाएं।
साइबर अपराध से बचने के लिए जागरुकता ही बेहतर जरिया है। इसके बाद भी कहीं से ऑनलाइन ठगी होती है तो तुरंत 1930 पर संपर्क कर सूचना दें। जितनी जल्दी सूचना देंगे, उतना ही आपकी राशि सुरक्षित रहेगी। - कालू सिंह, एएसपी।