नगर में स्थित चार प्राचीन तालाबों का कोई पुरसाहाल नहीं है। दशमिहवा, धनहवा, हरिहवा और भनगवा तालाब सूख गए हैं। सुंदरीकरण के नाम पर नगर पंचायत करीब एक करोड़ रुपये खर्च कर चुका है। स्थिति जस की तस है। तालाब अतिक्रमण की भेंट चढ़ता जा रहा है। शीघ्र अतिक्रमण नहीं रोका गया तो तालाब का अस्तित्व खत्म हो जाएगा।
घोरावल नगर के दशमिहवा, धनहवा, हरिहवा और भनगवा तालाब सौ वर्ष से भी अधिक पुराने हैं। हरिश्चंद्र रौनियार, दीपचंद अग्रहरि, रामधनी, पप्पू, मुनीम, सूरज प्रसाद उमर की मानें तो एक समय था जब तालाब पानी से भरा रहता था। स्नान के साथ ही कपड़े की धुलाई आदि होती थी। दशमिहवा और भनहवा तालाब के भीटे पर अक्सर लोगों की भीड़ रहती थी। अब लोगों के मकान भी तालाब के भीटों पर बनने लगे हैं। पेड़-पौधे नाम मात्र के बचे हैं। तालाबों खुदाई कराई गई मगर तहसील और नगर पंचायत प्रशासन से तालाब के गहरीकरण कराए जाने के साथ ही अतिक्रमण हटवाए जाने की मांग की है। वहीं नगर पंचायत के ईओ दिनेश कुमार कहते हैं कि भीटों पर अतिक्रमण की उन्हें जानकारी नहीं है। हर हाल में अतिक्रमण हटवाया जाएगा। उधर, एसडीएम घोरावल गिरिजा शंकर सिंह भी अतिक्रमण संज्ञान में न होने की बात कही।