अस्पताल में बुधवार को भर्ती डायरिया के मरीज।
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देवसर इलाके के बंधा गांव में डायरिया से चार महिलाओं की मौत हो गई। उल्टी-दस्त से डेढ़ दर्जन से अधिक लोग बीमार है। दस लोगों को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र देवसर में भर्ती कराया गया है। इसी पंचायत में करीब एक महीने पहले डायरिया की बीमारी फैलीथी, जिससे एक प्रौढ़ महिला की मौत हो गई थी। इसके बाद भी स्वास्थ्य अमला नहीं चेता। दोबारा बीमारी ने गांव के लोगों को अपने आगोश में ले लिया। बीमारी के बाद हरकत में आए स्वास्थ्य अमले ने गांव में कैंप लगा रखा है, जहां लोगों का उपचार किया जा रहा है, वहीं जिनकी हालत ज्यादा नाजुक है, उन्हें देवसर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती किया गया है।
रविवार को फूलमती सिंह गोंड़ (90) वर्ष की मौत हो गई। इसके बाद उसका दाह संस्कार करने के बाद गांव के अन्य लोग घर आए। शाम को एतवरिया सिंह गोड़ (65) की भी हालत बिगड़ने लगी, कुछ ही देर में उसकी मौत हो गई। इसके बाद बीमारी ने बिट्टी अगरिया और कुटेली अगरिया को भी अपने चपेट में ले लिया। उन्हें उल्टी-दस्त शुरू हुई और फिर कुछ ही देर में उनकी भी मौत हो गई। चार लोगों की मौत के बाद गांव में बीमारी की दहशत फैल गई। दर्जन भर अन्य लोग भी उल्टी-दस्त का शिकार हो गए। आनन-फानन में इसकी सूचना देवसर बीएमओ डॉ. सीएल सिंह को दी गई, वहीं बीमार लोगों को देवसर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया।
स्वास्थ्य विभाग ने बंधा पंचायत के लूरी और देवकुढ़ में कैप लगा है। ग्रामीणों का आरोप है कि देवसर बीएमओ डॉ. सीएल सिंह ने लापरवाही की जिसके कारण यह घटना हुई। करीब एक महीने पहले इसी पंचायत में डायरिया फैली थी, जिससे एक महिला की मौत हो गई थी। इसके बाद स्वास्थ्य अमले ने गंभीरता नहीं दिखाई, जिसके कारण बीमारी दोबारा भयावह रूप में सामने आई। उस दौरान चिकित्सकों ने कैप में बीमार लोगों को उपचार कर कोरम पूर्ति कर ली। लोगों को पानी में डालने वाली गोली एवं पाउडर नहीं दिया गया। जल स्रोतों में दवा नहीं डलवाई गई। हीरालाल अगरिया ने बताया कि स्वास्थ्य अमले ने कैंप तो लगा दिया है लेकिन समुचित उपचार की व्यवस्था नहीं की है। कैंप में नियमित रूप से चिकित्सक देखरेख नहीं कर रहे हैं। दवा महज कंपाउंडरों के भरोसे हैं। वहीं घटना के तीन दिन बाद भी सीएमएचओ डॉ.एस के सालम गांव में नहीं पहुंच सके हैं।